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उठने लगी पसमांदा मुसलमानों को आरक्षण की मांग
DASTAKTIMES
|November 2022
बीजेपी के पसमांदा मुसलमानों के बीच पैठ बनाने की ख़बरों के बीच उन्होंने एक बार फिर इस मांग को नए सिरे से उठाया है। संगठन का दावा है कि यदि मोदी सरकार वाकई में पसमांदा मुसलमानों का भला करना चाहती है तो उनकी पुरानी मांग को माना जाए। जानकारों की मानें तो बिना इस मांग को स्वीकार किए, पसमांदा मुसलमानों का बीजेपी के साथ जाना थोड़ा मुश्किल है। यही मांग बीजेपी और पसमांदा मुसलमानों के बीच दरार बन कर खड़ी करती है।
भारतीय जनता पार्टी के विरोधी हमेशा उस पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाते रहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि बीजेपी संगठन और सरकार में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व नहीं के बराबर है। बीजेपी चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशी भी नहीं उतारती है, लेकिन लगता है अबकी से बीजेपी पसमांदा समाज के सहारे यह दाग धोने की तैयारी कर रही है। यहां यह बताना जरूरी है कि पसमांदा मुसलमान कभी हिन्दू हुआ करते थे, बाद में यह धर्म परिर्वतन करके मुस्लिम जरूर बन गये थे। धर्म परिर्वतन करने वालों में अधिकांश दलित बिरादरी के लोग थे। यह मुस्लिम तो जरूर बन गए लेकिन मुसलमानों में भी इनकी गिनती दलितों और पिछड़ों के ही रूप में होती रही, जबकि कहा यह जाता है कि मुसलमानों में जातिवाद नहीं होता है, लेकिन अपर कास्ट मुसलमानों जैसे सैयद, पठान, खान आदि ने इन्हें कभी गले नहीं लगाया। यह इस बात का सबूत था कि इस्लाम में शिक्षा कुछ भी दी जाती हो, लेकिन वहां भी हिन्दुओं की तरह जातिभेद है। बीजेपी इसी का फायदा उठाना चाहती है, लेकिन उसके सामने समस्या कम नहीं है। इसीलिए तो जैसे ही पसमांदा समाज के मठाधीशों को यह पता चला कि बीजेपी उनको अपने साथ जोड़ने के लिए लालायित है तो देशभर के पसमांदा मुसलमानों के एक संगठन 'ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज' ने प्रधानमंत्री मोदी को एक चिट्ठी लिख कर मांग कर दी कि पसमांदा मुसलमानों में करीब दर्जनभर जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिया जाए, जो फिलहाल ओबीसी में आते हैं। वैसे यह मांग नई नहीं है, लेकिन उनकी इस मांग का टाइमिंग ज्यादा महत्व रखता है। बीजेपी के पसमांदा मुसलमानों के बीच पैठ बनाने की खबरों के बीच उन्होंने एक बार फिर इस मांग को नए सिरे से उठाया है। संगठन का दावा है कि यदि मोदी सरकार वाकई में पसमांदा मुसलमानों का भला करना चाहती है तो उनकी पुरानी मांग को माना जाए। जानकारों की मानें तो बिना इस मांग को स्वीकार किए, पसमांदा मुसलमानों का बीजेपी के साथ जाना थोड़ा मुश्किल है। यही मांग बीजेपी और पसमांदा मुसलमानों के बीच दरार बन कर खड़ी करती है।
Esta historia es de la edición November 2022 de DASTAKTIMES.
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