Facebook Pixel जब शब्द से ज़्यादा दर्द दे चुप्पी | Aha Zindagi - lifestyle - Lee esta historia en Magzter.com

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जब शब्द से ज़्यादा दर्द दे चुप्पी

Aha Zindagi

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January 2026

दांपत्य में साइलेंट ट्रीटमेंट यानी जानबूझकर बात न करना, सामने वाले को उसकी ग़लती का एहसास कराने या उसे सबक़ सिखाने का तरीक़ा समझा जाता है।

- - डॉ. पद्मा शर्मा

जब शब्द से ज़्यादा दर्द दे चुप्पी

कई बार इसे टकराव से बचने की समझदारी माना जाता है, लेकिन वास्तव में यह रिश्ते की आत्मा, यानी संवाद को ख़त्म कर देने जैसा होता है। बिना शब्दों के दी गई यह सज़ा अक्सर उस साथी को अपराधी बना देती है, जो समझ ही नहीं पाता कि उसने ग़लती कहां की। यह लेख इसी चुप्पी को समझने और सुलझाने की एक कोशिश है।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद्। कहानी-संग्रह, कविता-संग्रह, उपन्यास, निबंध व आलोचनात्मक पुस्तकें प्रकाशित। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं और साहित्यिक पोर्टलों पर 198 शोध-पत्र प्रकाशित।

संवाद वह पुल है जो रिश्तों में भावनात्मक गहराई लाता है और टूटते संबंधों में नई ऊर्जा भर देता है। मौन तपस्वियों के लिए साधना हो सकता है, किंतु गृहस्थ जन प्रायः उसे साधन नहीं, हथियार बना लेते हैं। आज का मनुष्य प्रायः एकल परिवार में रहता है जहां पति और पत्नी ही पूरा संसार होते हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि घर में कभी-कभी बर्तन खनकें। किंतु यह ध्यान रखना आवश्यक है कि मतभेद हों, मनभेद नहीं। आजकल यही मनभेद धीरे-धीरे चुप्पी का रूप लेने लगता है। यदि यह चुप्पी केवल क्रोध शांत करने के लिए कुछ घंटों या एक-दो दिन तक सीमित हो तो उचित कही जा सकती है, लेकिन जब यह अहंकार से जुड़ जाए और लंबी अवधि तक खिंच जाए तो रिश्तों के लिए घातक सिद्ध होता है। वास्तव में बातचीत के माध्यम से बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है। लेकिन जब व्यक्ति मन में कटुता भरकर संवाद बंद कर देता है और यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो संबंध धीरे-धीरे मृतप्राय होने लगते हैं। अधिकांश रिश्ते अहं या वहम के कारण टूटते हैं। इसलिए 'अहं' दिखाने के बजाय 'अहमियत' जतानी होगी। यह भी समझना ज़रूरी है कि लंबे समय तक बातचीत बंद रहने का प्रभाव घर के अन्य सदस्यों पर, विशेषकर बच्चों पर, गहरा पड़ता है। बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार से ही सीखते हैं, इसलिए दोनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। रिश्तों की रक्षा के लिए ख़यालात बदलने होंगे। समय बदल चुका है, पहले मौन क्रोध को शांत करने का माध्यम हुआ करता था, लेकिन आज ओढ़ा गया मौन क्रोध का हथियार बनता जा रहा है। अधिक समय तक साधा गया मौन बड़े घाव में परिवर्तित हो जाता है, क्योंकि क्रोध अंततः बैर का रूप ले लेता है।

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