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इनके ऋण से हम कैसे उऋण हो पायेंगे ?
Rishi Prasad Hindi
|February 2020
'हे विद्वानो ! आपकी उपदेश-वाणियों से प्रेरित होकर हम कानों से सदा कल्याणकारक एवं सुखकर वचनों को सुनें।'
संतों की आलोचना वे करते हैं जो निगुरे हैं, जो संतों से जुड़े ही नहीं हैं। वे गुरु का महत्त्व जानते ही नहीं हैं। मैं १% भी बिल्कुल पक्ष नहीं ले रहा हूँ और न ही मेरा किसी भी प्रकार का स्वार्थ है। मैंने पहले भी बोला था और फिर बोल रहा हूँ। चाहे जितना मीडिया ने दिखाया हो, चाहे कुछ कहा हो लेकिन जिस दिन आप संत आशारामजी बापू को जेल से यहाँ देख लें तो गिनती नहीæ
Esta historia es de la edición February 2020 de Rishi Prasad Hindi.
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