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और फिर उन्होंने एक गहरी साँस ली!
Shaikshanik Sandarbh
|September - October 2021
जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे अलग-अलग तरीकों से अपने आसपास की दुनिया को समझने की कोशिश करते हैं। थोड़ी समझ उनके अपने अवलोकनों के कारण विकसित होती है, थोड़ी अपने माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों की बातचीत सुनकर, तो थोड़ी लोकप्रिय माध्यमों से मिलने वाले सन्देशों से। शिक्षक और पाठ्यपुस्तकें भी बच्चों के ज्ञान के इस भण्डार में इजाफा करते हैं। बहरहाल, अक्सर बच्चे वास्तविक दुनिया के अनुभवों से जो समझ विकसित करते हैं, वह कक्षा में सीखी गई बातों से भिन्न होती है। स्कूली शिक्षा बिरले ही इस दोहरी, समानान्तर समझ पर कोई काम करती है।
हमने श्वसन पर एक मॉड्यूल बनाया जिससे बच्चों के सहजबोध को पहचान सकें, और जिसकी मदद से इस अवधारणा को बेहतर ढंग से समझ सकें। शिक्षिका ने कक्षा की शुरुआत बच्चों से यह कहते हुए की कि वे सब दो-चार गहरी साँसें लें। थोड़ी शुरुआती हिचक के बाद बच्चे मान गए और गहरी साँसें लेने लगे।
"हम साँस के ज़रिए अपने भीतर हवा लेते हैं या ऑक्सीजन?" शिक्षिका ने पूछा।
Esta historia es de la edición September - October 2021 de Shaikshanik Sandarbh.
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