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उठने-बैठने का तरीका बनाता है आत्मविश्वासी
Grehlakshmi
|September 2023
पॉश्चर यानी बैठने, खड़े होने और बातचीत करने की मुद्रा, यदि यह सही रहती है तो आप हमेशा आत्मविश्वास से भरे रहते हैं।
आज के समय में ज्यादातर लोगों का पॉश्चर खराब है। स्कूलों में बच्चे पीठ दर्द के बारे में शिकायत करते हैं और उनके कंधे झुके हुए होते हैं, तो फिर वयस्कों की तो बात ही छोड़िए। समस्या यह है कि हम अपना पूरा दिन आवश्यकता से अधिक समय के लिए बैठकर बिताते हैं। लैपटॉप, फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस के बढ़ते इस्तेमाल के कारण समस्या बद से बदतर होती जा रही है। इससे धीरेधीरे हमारी रीढ़ की हड्डी के प्राकृतिक एलाइनमेंट पर असर पड़ रहा है। खराब पॉश्चर के कारण न केवल पीठ और गर्दन प्रभावित होती है बल्कि यह हमारी बॉडी लैंग्वेज, सेल्फ इमेज यहां तक कि हमारे अपने बारे में सोचने के तरीके को भी खराब करती है। इस लिहाज से अगर देखा जाए तो केवल अपने पॉश्चर और बॉडी लैंग्वेज पर काम करने से ही आत्मविश्वास के स्तर में बहुत हद तक बदलाव आ सकता है। भले ही आप घबराए हुए हों, आप अपने दिमाग को यह सोचकर धोखा दे सकते हैं कि आपके भीतर भरपूर आत्मविश्वास है। मुख्य बात यह है कि आपका दिमाग वास्तविकता और कल्पना के बीच अंतर नहीं जानता है और इसलिए आपके पास यह सुपरपावर है कि आत्मविश्वास ना होते हुए भी ऐसा सोच सकते हैं और दिख सकते हैं।
आत्मविश्वास क्यों जरूरी है
Diese Geschichte stammt aus der September 2023-Ausgabe von Grehlakshmi.
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