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भारत के आय सर्वेक्षण से जुड़ी चुनौतियाँ

Business Standard - Hindi

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November 24, 2025

एक आदर्श दुनिया में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा अगले वर्ष आयोजित पारिवारिक आय सर्वेक्षण (एचआईएस) में भाग लेने वाले लोग (उत्तरदाता) फिल्म 'दीवार' के 'विजय' जैसे होंगे। उस अमर संवाद को याद कीजिए जब अमिताभ बच्चन (विजय), शशि कपूर (रवि) से कहते हैं: 'आज मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है।' माना कि यह बातचीत दो भाइयों के बीच हो रही है न कि एक सर्वेक्षक और एक उत्तरदाता के बीच। अगर परिवार अपनी प्रतिक्रियाएं देने में इतने ही तत्पर हों तो एचआईएस का संचालन बहुत आसान होगा।

पिछले 75 वर्षों में सांख्यिकीय प्रणाली ने दो कारणों से उपभोग व्यय के सर्वेक्षण किए हैं। पहला, परिवार आय के बजाय उपभोग व्यय का खुलासा करने में अधिक सहज होते हैं। दूसरा, भारत में खाद्य सुरक्षा और भूख की समस्या थी और उपभोग पर ध्यान केंद्रित करना समझ में आता था। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत परिवारों की आय के बारे में जानकारी एकत्र नहीं करता है। वार्षिक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण में परिवारों के सभी कामकाजी सदस्यों की श्रम-बाजार आय के बारे में जानकारी होती है। कृषि परिवारों का स्थिति आकलन सर्वेक्षण (एसएएस) कृषक परिवारों से उनकी आय के विभिन्न स्रोतों के बारे में जानकारी एकत्र करता है। परिवारों की आय के बारे में जानकारियां अन्य स्रोतों से भी उपलब्ध हैं, जिनमें भारत मानव विकास सर्वेक्षण, उपभोक्ता पिरामिड पारिवारिक सर्वेक्षण, नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक) वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण आदि शामिल हैं। एचआईएस की योजना के हिस्से के रूप में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सर्वेक्षण आयोजित करने में आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए एक प्रायोगिक सर्वेक्षण आयोजित कर सावधानी बरतने का निर्णय लिया है। इसमें क्षेत्रों से मिली प्रतिक्रिया प्राथमिक चिंता की पुष्टि करती है। वह चिंता यह है कि 95 फीसदी उत्तरदाताओं ने साक्षात्कारकर्ता को आय के विभिन्न स्रोतों के बारे में जानकारी देने में सहज महसूस नहीं किया। चूंकि, परिवार अपनी आय कम कर बताते हैं, इसलिए कुछ को 'आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैय

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