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मार गरीबों पर
Outlook Hindi
|July 21, 2025
बढ़ते जलवायु संकट से भीषण गर्मी, बाढ़, भूस्खलन में बढ़ोतरी से हाशिए के लोग सबसे ज्यादा शिकार
भारत में जलवायु परिवर्तन अब केवल मौसम का उतार-चढ़ाव नहीं रह गया है। अब इसके सामाजिक और आर्थिक पक्ष भी तेजी से उभरने लगे हैं। जलवायु संकट की बड़ी वजह औद्योगीकीकरण और अमीरों की आरामदायक जीवन-शैली वगैरह मानी जाती है, जिसकी कीमत गरीब और हाशिए पर जीने वाले लोग चुका रहे हैं। पर्यावरण के साथ की गई मनमानी का बोझ अब मजदूर वर्ग के सिर पर टूट रहा है, वही सबसे ज्यादा इसकी मार झेल रहे हैं। 2023 की ऑक्सफैम की रिपोर्ट इस बात की तसदीक करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोग, सबसे गरीब 50 प्रतिशत लोगों की तुलना में चार गुना अधिक कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। इसके पीछे उनकी जीवनशैली है, जिसमें बड़ी-बड़ी एसयूवी गाड़ियां, लगातार चलने वाले एयर कंडीशनर और अनियंत्रित उपभोग के सामान शामिल हैं। इन सबने मिलकर ग्लोबल वार्मिंग को तेजी से बढ़ाया है।
इस असमानता का एक और आयाम है सामाजिक संरचना। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आइआइएम), बेंगलूरू की एक रिपोर्ट बताती है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव न केवल आर्थिक, बल्कि जातिगत आधार पर भी असमान है। निम्न जातियों और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों को गर्मी, बाढ़ और सूखे का सामना करने के लिए अपर्याप्त संसाधनों के साथ जीना पड़ता है।
मौसम की मार
वैसे तो पूरे दक्षिण एशिया को जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से बिगड़ते प्रभावों के चलते 'रेड जोन' में रखा गया है। लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रभाव भारत पर पड़ रहा है। इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में गर्मियों का मौसम समय से पहले आ गया था। देश में कई जगहों पर तापमान 50 डिग्री के पार होना अब 'सामान्य' हो गया है। विश्व मौसम संगठन की 2023 की स्टेट ऑफ द क्लाइमेट रिपोर्ट के अनुसार, 2023 अब तक का सबसे गर्म साल था। हालांकि, सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि बाढ़ और सूखे की समस्या भी काफी तेजी से बढ़ी हैं। इससे भी धन्नासेठ नहीं, बल्कि गरीब ही प्रभावित हुए हैं।
Diese Geschichte stammt aus der July 21, 2025-Ausgabe von Outlook Hindi.
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