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लोकतंत्र के मर्यादा मार्ग पर कदमताल की वेला
Open Eye News
|January 2023
बीत गया साल भी ऐसे कई सवाल छोड़ गया है, जिनके जवाब आने अभी बाकी हैं।
हम दुनिया की सबसे बड़ी जम्हूरियत हैं। इसके साथ ही सबसे बड़ा सवाल हमारे सामने आता है कि क्या हमारे नुमाइंदे इस बड़े लोकतंत्र के हिसाब से आचार व्यवहार करते हैं? क्या उनकी कथनी और करनी एक जैसी है? उनमें ऐसे गुण हैं कि हम अपने बच्चों से कह सकें कि तुम बड़े होकर फलां नेता जैसा बनना? यहां राजनीति में लगातार बढ़ रहे दागी लीडरों की संख्या का सवाल नहीं है। सवाल आम जनता के बीच से होकर गुजरता है। जब मुल्क आजाद हुआ तब कहीं भी ऐसे हालात न थे। अच्छे बुरे नेता हर दौर में होते हैं। आजादी के बाद के कुछ सालों तक तो स्वतंत्रता आंदोलन की कोख से पैदा हुए लीडरों ने सामाजिक जिंदगी में तमाम तरह की मिसालें पेश की थीं। मगर धीरे-धीरे मर्यादा में गिरावट का दौर तेजी पकड़ता रहा, जो अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश की संसद से लेकर विधानसभाओं में विधायकों में मारपीट के तमाम किस्से बार-बार सामने आते रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सपा व भाजपा के विधायकों की मारपीट के कई किस्से हम सबने सुने हैं। पिछले साल मार्च में बंगाल विधानसभा में भी विधायकों के बीच मारपीट का मामला सामने आया था। वहां बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के विधायकों में जमकर मारपीट हुई थी, जिसके बाद पांच विधायकों को सस्पेंड कर दिया गया था। ऐसी ही कई घटनाएं बिहार विधानसभा में भी हुई। सवाल ये है कि अवाम के नुमाइंदे उनकी तरक्की और भलाई के लिये चुने जाते हैं तो लड़ाई झगड़ा किस लिये? लीडरों का यही आचरण जनता का भरोसा खोने की वजहबनता है। सही बात तो ये है कि देश की राजनीति आज इतनी बदरंग हो गई है कि जनता उसे भरोसे के काबिल नहीं समझती। एक समय था जब राजनीति में उसूलों को तरजीह दी जाती थी। एक बार संसद में पंडित नेहरू ने अपनी गलती का अहसास होने पर जनसंघ नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी से माफी मांगी थी। अटल बिहारी वाजपेयी देश के हाजिरजवाब और बेबाक लीडर थे। विपक्ष में रहते हुए वे सरकार की नीतियों पर तीखे हमले बोलते थे। एक मौके पर पंडित नेहरू ने किसी से पूछा, ये तेजतर्रार लड़का कौन है?
Diese Geschichte stammt aus der January 2023-Ausgabe von Open Eye News.
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