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अडाणी पर कैसे टूटा मुसीबतों का पहाड़!

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December 2024

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ गौतम अडाणी की निकटता को देखते हुए, यह गंभीर संघीय आरोप नवनियुक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी-भारत संबंधों को जटिल बना सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह यह हाल के वर्षों में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा चलाए गए सबसे हाईप्रोफाइल मामलों में से एक है, जिसमें कई अधिकार क्षेत्रों को पार किया गया है।

- दयाशंकर शुक्ल सागर

अडाणी पर कैसे टूटा मुसीबतों का पहाड़!

रिश्वतखोरी कांड की अमेरिकी जांच की अंदरूनी कहान

क्या देश के रसूखदार अरबपति कारोबारी गौतम अडाणी अमेरिका की अंदरूनी राजनीति का शिकार हुए हैं। अमेरिका में इस केस की जांच पिछले कोई तीन साल से चल रही रही थी लेकिन अडाणी की कंपनी के खिलाफ घूस बांटने का अभियोग उस समय समाने आए जब चुनाव हार चुकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के नेतृत्व वाली सरकार अपने आखिरी दिन गिन रही है। इन अभियोगों का खुलासा करने वाले न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले (ईडीएनवाई) के अमेरिकी अटॉर्नी ब्रे ऑन पीस का कार्यकाल बाइडन के साथ खत्म हो जाएगा। अमेरिका में राष्ट्रपति अटॉर्नी की नियुक्ति करता है। इसी कोर्ट ने अडाणी की कंपनी पर आरोप तय किए हैं कि भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के ठेके हासिल करने के लिए उनकी कंपनी ने भारतीय अधिकारियों को लगभग 2,250 करोड़ रुपये की रिश्वत आफर की थी। अडाणी समूह ने इन प्रोजेक्ट्स के लिए अमेरिकी निवेशकों से फंड जुटाया था। अमेरिका के नवनिर्वाचित डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट से रिश्ते सहज नहीं हैं। वे जस्टिस डिपार्टमेंट में आमूलचूल परिवर्तन की बात पहले कर चुके हैं। पिछले दिनों अडाणी ने सोशल मीडिया पर ट्रंप को जीत पर बधाई देते हुए अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश और 15,000 अमेरिकी लोगों को रोजगार का ऐलान किया था। ऐसे में आनन-फानन में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने अडाणी ग्रुप के चेयरमैन और संस्थापक गौतम अडाणी समेत आठ लोगों पर आरोप तय कर सारी दुनिया के कारोबारी जगत में हलचल पैदा कर दी। मजे की बात है कि घूस देने और न्याय में बाधा पहुंचाने, इन दो मामलों में अमेरकी एजेंसियों ने गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी को सीधे आरोपी नहीं बनाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अडाणी की निकटता को देखते हुए, ये गंभीर संघीय आरोप नवनियुक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी-भारत संबंधों को जटिल बना सकते हैं।

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