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हेमंत का मास्टर स्ट्रोक झारखंड में 'पेसा' को मंजूरी

DASTAKTIMES

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January 2026

लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार झारखंड कैबिनेट ने पेसा (PESA) नियमावली को मंजूरी दे दी है।

- रांची से वरिष्ठ पत्रकार उदय चौहान की रिपोर्ट।

हेमंत का मास्टर स्ट्रोक झारखंड में 'पेसा' को मंजूरी

इससे राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और जल, जंगल, जमीन व खनिज संसाधनों पर स्थानीय जनजातीय समुदायों का नियंत्रण स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मुख्यमंत्री सोरेन के इस प्रयोग को 'ग्राम सभा सशक्तिकरण' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

25 वर्ष के बाद झारखंड में अब पेसा कानून लागू होगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया जा रहा है। राज्य के कई आदिवासी संगठन सरकार के इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं। इससे आदिवासियों, उनकी परंपराओं और जल जंगल जमीन का संरक्षण होगा। आदिवासी बहुल इलाके में उनका विकास होगा। आदिवासियों की जमीन सुरक्षित रहेगी। ग्राम सभा को मिले अधिकार के बाद उन क्षेत्रों में विकास हो सकेगा जहां अभी भी बुनियादी सुविधाएं तक मौजूद नहीं हैं। यही नहीं, इस कानून के लागू होने के बाद इसे केंद्र सरकार की तरफ से करोड़ों का फंड मिल सकेगा जिससे आदिवासी क्षेत्र का विकास होगा। झारखंड देश के उन 10 राज्यों में शामिल था जहां पेसा अधिनियम लागू करने के लिए अब तक नियमावली को मंजूरी नहीं मिली थी। आदिवासी संगठन इस मुद्दे को लगातार उठा रहे थे। वहीं झारखंड हाईकोर्ट का भी सरकार पर दबाव था।

imageयह कानून राज्य के अनुसूचित जिलों में लागू होगा लेकिन अनुसूचित जिलों के नगर निकाय क्षेत्र में यह लागू नहीं होगा बल्कि सिर्फ पंचायत में लागू होगा। इससे अनुसूचित जिलों में स्वशासन भूमि खनिज और जल प्रबंधन अब ग्रामसभा के हाथ में चला जाएगा। ऐसे में ग्रामसभा पहले से कहीं ज्यादा सशक्त होंगी और विकास योजनाओं में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यह नियमावली पेसा अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ही बनाई गई है। यह कानून रांची, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां, साहिबगंज, दुमका, पाकुड़, जामताड़ा, इसके साथ ही पलामू जिले के सतबरवा ब्लॉक के रब्बा और बकोरिया पंचायत, गोड्डा जिले के सुंदर पहाड़ी और बरजोड़ी ब्लॉक में लागू होगा।

imageपूरा हुआ सपना

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