Mit Magzter GOLD unbegrenztes Potenzial nutzen

Mit Magzter GOLD unbegrenztes Potenzial nutzen

Erhalten Sie unbegrenzten Zugriff auf über 9.000 Zeitschriften, Zeitungen und Premium-Artikel für nur

$149.99
 
$74.99/Jahr

Versuchen GOLD - Frei

'माननीय' बनने में क्यों पिछड़ रही 'आधी आबादी'

DASTAKTIMES

|

May 2024

राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम क्यों है? इसकी वजह तालाशी जाए तो यह साफ है कि भारत एक गहन पितृसत्तात्मक समाज है और महिलाओं को प्रायः पुरुषों से हीन माना जाता है। यह मानसिकता समाज में गहराई तक समाई हुई है और महिलाओं की राजनीति में नेतृत्व एवं भागीदारी की क्षमता के संबंध में लोगों की सोच को प्रभावित करती है।

- संजय सक्सेना

'माननीय' बनने में क्यों पिछड़ रही 'आधी आबादी'

आजादी के करीब 75 वर्षों के बाद भी भारत में राजनीतिक रूप से महिलाओं को उनका प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। इसके लिए एक तरफ तमाम राजनीतिक दलों का शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार है तो वहीं मतदाता भी कसूरवार हैं जो मतदान करते समय महिला उम्मीदवारों पर पूरी तरह से विश्वास नहीं रख पाते है। जबकि हम सामाजिक पुनर्जागरणकाल और राजनीतिक चेतना का विकास साथ-साथ मानने पर पाते हैं कि सामाजिक पुनर्जागरण और नारी का मुक्ति-संघर्ष 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में एक साथ तब हुआ था, जब बंगाल में ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय, बंबई (अब मुम्बई) में प्रार्थना समाज के संस्थापक महादेव गोविंद रानाडे और उत्तर पश्चिम भारत में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद ने अपने सामाजिक सुधारों में स्त्री-उत्थान में कार्य को प्रमुख स्थान दिया था। 1857 में भारत के पहले बड़े स्वतंत्रता-संग्राम और 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद सामाजिक सुधार और राजनीतिक चेतना की यह मिली-जुली प्रवृति साथ-साथ आगे बढ़ी। उधर, महिलाओं को आगे बढ़ाने के मामले में आज कांग्रेस की स्थिति जैसी भी हो लेकिन कांग्रेस के जन्मकाल में स्त्रियां किसी न किसी रूप में अपनी भूमिका अदा करती रही थीं। परिणाम स्वरूप सामाजिक संस्थाएं और महिला संगठन उनमें राजनीतिक जागृति लाने में सहायक रहे थे, किन्तु इसे महिलाओं का राजनीति में सीधे प्रवेश नहीं कहा जा सकता है। 

WEITERE GESCHICHTEN VON DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

गलत मुद्दे पर दांव!

यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी एसआईआर को मुद्दा बनाने की तैयारी में दिख रही है

time to read

9 mins

December 2025

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

तरक्की से कदम ताल !

बीते महीने झारखंड ने 15 नवंबर को अपना 25वां स्थापना दिवस मनाया।

time to read

4 mins

December 2025

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

यूपी में विपक्ष सदमे में

बिहार के चुनावी नतीजों से विपक्ष में मंथन शुरू

time to read

6 mins

December 2025

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

मौत से बेतरह डरते थे धर्मेंद्र

धर्मेंद्र को जिंदगी से बेपनाह मुहब्बत थी। वह नब्बे के हो चले थे।

time to read

2 mins

December 2025

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

गहरे सदमे में तेजस्वी

अति आत्मविश्वास तेजस्वी को ले डूबा।

time to read

5 mins

December 2025

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

अब प्रशांत किशोर का क्या होगा ?

शर्मनाक पराजय के बाद प्रशांत किशोर ने मीडिया के सामने आगे की जो रणनीति साझा की उससे साफ है कि वह अपने तौर-तरीकों में जरा भी बदलाव नहीं लाने जा रहे हैं।

time to read

6 mins

December 2025

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

धामी की राजस्व रणनीति

आर्थिक प्रबंधन में उत्तराखंड की ऊंची उड़ान

time to read

3 mins

December 2025

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

चिकोटी काटा, बकोटा नहीं

सुप्रसिद्ध वरिष्ठ पत्रकार व कई अख़बारों के संपादक रहे नवीन जोशी पर आई नई किताब 'नवीन धुन' इन दिनों चर्चा में है। इस किताब में सत्तर के दशक से लेकर नई सदी के शुरुआती सालों की पत्रकारिता की एक धुन सुनाई देती है। ऐसी धुन जो मौजूदा दौर के पत्रकारों और पत्रकारिता की ट्रेनिंग ले रहे छात्रों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं। प्रस्तुत है इस नई पुस्तक के कुछ अंश।

time to read

11 mins

December 2025

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

इतना आसान नहीं बिहार का सफ़र

नीतीश की नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। आगे बीजेपी को बिहार पर राज करना है तो किए गए वादे निभाने होंगे।

time to read

11 mins

December 2025

DASTAKTIMES

DASTAKTIMES

सदाबहार धर्मेंद्र... अलविदा

एक अभिनेता और एक दिग्गज स्टार के रूप में अपनी उम्र के साठ से ज़्यादा सालों के शानदार सफर में, धर्मेंद्र को 'ही मैन' और 'गरम धरम' दोनों नामों से पुकारा जाता रहा।

time to read

4 mins

December 2025

Listen

Translate

Share

-
+

Change font size