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हलाल के सर्टिफिकेट से 'हराम' की कमाई
DASTAKTIMES
|December 2023
हलाल सर्टिफिकेट बांटने वाली कम्पनियों और संस्थाओं जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट का कहना है कि दुनियाभर में हलाल प्रोडक्ट की मांग बहुत ज्यादा है, ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए ऐसा सर्टिफिकेट हासिल करना बहुत जरूरी है परंतु यहां भी यह संस्थाएं झूठ का सहारा लेते दिख रही हैं, क्योंकि योगी सरकार ने निर्यात होने वाले सामानों पर हलाल सार्टिफिकेट पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया है। अब तो इनके खातों की जांच के बाद ही तमाम सच्चाई सामने आयेगी।
उत्तर प्रदेश में हलाल प्रमाण पत्र का मुद्दा सुर्खियों में है। ऊपरी तौर पर हलाल सर्टिफिकेट के मसले पर योगी सरकार की सख्ती कुछ ज्यादा गंभीर नजर आती है, लेकिन जब इसकी तह में जाया जाता है तो पता चलता है कि हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर देश की जड़ों को खोखला करने में लगीं देशी-विदेशी ताकतों ने प्रदेश में साम्प्रदाकिता का जहर घोलने का लम्बा-चौड़ा प्लान तैयार कर रखा है। यह मुद्दा सिर्फ सर्टिफिकेट तक नहीं सीमित है, न ही इसका किसी की भावनाओं से कोई खास लेना देना है। हलाल सर्टिफिकेट का काला धंधा कुछ देशविरोधी शक्तियों की दिमागी फितूर का हिस्सा है क्योंकि व्यापार तो बिना हलाल सर्टिफिकेट के सदियों से चल रहा था, कहीं कोई अड़चन नहीं आती थी। सच्चाई यह है कि हलाल सर्टिफिकेट के पीछे तमाम देशविरोधी शक्तियां खड़ी है जिनका नेटवर्क कई मुल्कों तक फैला हुआ है। हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर कुछ संस्थाओं की मोटी कमाई हो रही थी। यह धंधा करीब साढ़े चार हजार करोड़ तक पहुंच गया था, कमाई के चक्कर में उन उत्पादों पर भी हलाल का ठप्पा लगाया जा रहा था, जिसका हलाल या हराम से कोई लेनादेना ही नहीं होता है। हाल यह है कि हलाल के ठप्पे के नाम पर चीनी, चाय की पत्ती, तुलसी अर्क से लेकर धनिया पाउडर, एलोवेरा जूस, आई ड्राप पैकिंग पर हलाल प्रिंट उत्पाद खूब बिक रहे हैं। समय की मांग है कि सरकार हैं इस मामले में व्यापक कार्रवाई करते हुए उन लोगों की गिरफ्तारी भी करे जो इस अनैतिक धंधे में लगे हुए थे, जिनकी जड़ें बेहद गहरी हैं । इस धंधे में लगे लोगों को राजनीतिक और शासन-प्रशासन के स्तर पर भी संरक्षण मिला हुआ है। ऐसे लोगों को भी नहीं बख्शा जाना चाहिए।

Diese Geschichte stammt aus der December 2023-Ausgabe von DASTAKTIMES.
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