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कर्मयोगी स्वामी विवेकानन्द जन्मपत्रिका विश्लेषण
Jyotish Sagar
|January 2024
गुरु महादशा में गुरु की अन्तर्दशा तथा शुक्र की प्रत्यन्तर्दशा में हुए शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में दिए गए व्याख्यानों से उन्हें अभूतपूर्व ख्याति प्राप्त हुई।
सितम्बर, 1893 स्थान शिकागो कला संस्थान, अवसर विश्व धर्म सम्मेलन 7000 व्यक्तियों की उपस्थिति में जब हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व कर रहे स्वामी विवेकानन्द ने अपना व्याख्यान प्रारम्भ किया, तो सभी उनकी वाणी से जैसे मन्त्रमुग्ध हो गए और हिन्दूधर्म तथा भारतीय संस्कृति की उनकी अभिनव व्याख्या से प्रभावित बिना नहीं रह सके।
विवेकानन्द जी का जन्म 12 जनवरी, 1863 को सूर्योदय से कुछ मिनट पूर्व हुआ था। यह दिन मकर संक्रान्ति उत्सव का था। ऐसा प्रतीत होता था कि जैसे भगवान् सूर्य अब दक्षिण अयन को त्यागकर उत्तर अयन में प्रवेश कर रहे हैं और यह नवजात बालक उनके आगमन की सूचना दे रहा हो। उनके पिता विश्वनाथ दत्त के लिए यह दिन बहुत ही महत्त्वपूर्ण था, क्योंकि उनके घर में मकर संक्रान्ति की प्रत्यूष काल में बालक का जन्म ऐसे था, जैसे भगवान् सूर्य ने ही आकर उन्हें उपहार प्रदान किया हो । विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट में अधिवक्ता थे। माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक महिला थीं। इनके इष्ट भगवान् शिव थे। पिता ने विवेकानन्द जी का नाम 'नरेन्द्रनाथ दत्त' रखा। बालक नरेन्द्र पर अपने माता एवं पिता दोनों का ही प्रभाव पड़ा था। नरेन्द्र बचपन से ही पढ़ने-लिखने में बहुत होशियार थे। उन्हें दर्शन, इतिहास, सामाजिक विज्ञान तथा साहित्य में छात्रवृत्ति प्राप्त हुई। उनकी बचपन से ही रुचि उपनिषद्, भगवद्गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों में थी। साथ ही, उन्हें संगीत की भी अच्छी शिक्षा-दीक्षा प्राप्त हुई। शिक्षा प्राप्त करने के साथ ही वे अपने शरीर का भी पूरा ध्यान रखते थे। नित्य व्यायाम एवं खेलकूद के जरिए अपने शरीर को बलिष्ठ रखना भी उनका एक प्रकार से शौक ही था।
Denne historie er fra January 2024-udgaven af Jyotish Sagar.
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