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यह है देश का सबसे निर्णायक दशक

January 05, 2026

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Business Standard - Hindi

आप सोच सकते हैं कि 1985-95 का दशक तो बहुत पहले समाप्त हो चुका है। परंतु यह सच नहीं है। उस दशक में उभरे मुद्दे अभी भी भारत में हो रहे विमर्श को आकार दे रहे हैं।

- बता रहे हैं शेखर गुप्तास

यह है देश का सबसे निर्णायक दशक

समाचार पत्रिका इंडिया टुडे 50 वर्ष की हो गई है। पत्रिका ने मुझसे 1985 से 1995 के दशक पर लिखने को कहा। यही वह समय था जब मैं वहां काम करता था। उसका परिणाम इस लेख के रूप में सामने आया।

एक युवा और उभरते गणराज्य में यकीनन विभिन्न दशकों के बीच इस बात की प्रतिस्पर्धा होगी कि उनमें से किसे सर्वाधिक निर्णायक माना जाए। इस कसौटी पर 1985-1995 का दशक सबसे अधिक ऐसी खबरों वाला रहा जो आज भी हमारे लोकतंत्र और बहसों पर हावी हैं।

देश में और बाहर भी देखें तो कांग्रेस का अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद पराभव, पहले गठबंधन, बोफोर्स स्कैंडल, मंडल बनाम मंदिर, पंजाब और कश्मीर में अशांति, श्रीलंका और मालदीव में दो भारतीय सैन्य हस्तक्षेप, पाकिस्तान के साथ दोबार जंग जैसे हालात, चीन के साथ सुमदोरोंग चू में गतिरोध और उसके बाद तंग श्याओ फिंग के साथ रिश्तों में सुधार, जिया उल हक और राजीव गांधी की हत्या, इस्लामी जिहाद का वैश्वीकरण और कश्मीर में इसका प्रसार तथा भारतीय अर्थव्यवस्था का मुक्त होना। हालांकि दशक की शुरुआत कांग्रेस की 414 लोक सभा सीटों के साथ हुई थी लेकिन उन दस सालों में चार प्रधानमंत्री देश को मिले। क्या एक दशक के लिए यह काफी नहीं?

यह पूरी बात नहीं है। आर्थिक सुधारों के कारण जब भारत का वैश्विक कद बढ़ा तो इंडिया टुडे अपने पाठकों को दुनिया भर में ले गई। अफगान युद्ध से लेकर ध्यानअनमेन चौक तक और सोवियत संघ के पतन से लेकर पहले खाड़ी युद्ध तक। शीत युद्ध का अंत हो गया, रंगभेद का अंत हुआ, भारत और इजरायल दोस्त बने।

पीढ़ीगत बदलाव हों या अनंत बहसें। अलग-अलग दशकों की तुलना नहीं की जा सकती। स्वतंत्रता के बाद से भारत जिन आशंकाओं को पालता रहा, मसलन राजनीतिक अस्थिरता, सांप्रदायिक और जातीय विभाजन, स्थिरता देने वाले वंश का पतन, परमाणु और आतंकवादी खतरे, सबसे विश्वसनीय सहयोगी (सोवियत संघ) को खोना- ये सारी बातें इस दशक में सच साबित हुईं। यह सिक्के का एक पहलू है। दूसरा पहलू यह है कि भारत ने कैसे प्रतिक्रिया दी। उसने गठबंधनों पर भरोसा करना सीखा, अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार किए, रणनीतिक रूप से पुनर्स्थापित हुआ और अपने मानव संसाधनों का लाभ उठाया। भारत कहीं अधिक मजबूत बनकर उभरा, और उसकी वैश्विक मौजूदगी लगातार बढ़ती गई।

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