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क्यों जरूरी है सेक्युलरिज्म

July First 2025

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सेक्युलरिज्म का मतलब कांग्रेस के लिए कुछ और है तो बीजेपी अपने तरीके से सेक्युलरिज्म की व्याख्या करती है. राजनीति के पक्षविपक्ष के खेल में आम आदमी सेक्युलरिज्म को ले कर हमेशा भ्रमित ही रहता है. क्या है सेक्युलरिज्म की वास्तविकता? क्यों यह भारत जैसे देश के लिए जरूरी है?

- • शकील प्रेम

क्यों जरूरी है सेक्युलरिज्म

जब भी सैक्युलरिज्म की बात होती है, कुछ लोगों के कान खड़े हो जाते हैं. तमाम राजनीतिक दल सैक्युलरिज्म शब्द को अपने हिसाब से परिभाषित करते हैं. दिनरात चलते टेलीविजन डिबेट्स ने तो सैक्युलरिज्म शब्द की गरिमा को लगभग नष्ट ही कर दिया है. यही कारण है कि कुछ लोग सैक्युलर होने को सिक्कुलर होना कहने लगे हैं. हिंदू धर्मगुरुओं को तो सैक्युलरिज्म से नफरत है ही, सत्ताधारी दल की विचारधारा में भी सैक्युलरिज्म के लिए कोई जगह नहीं है.

कौन करता है सैक्युलरिज्म का विरोध

बीजेपी के कई नेता कौन्स्टिट्यूशन के प्रियम्बल में लिखे गए ‘सेक्युलर' शब्द को हटाने की बात करते हैं. पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कौन्स्टिट्यूशन के प्रियम्बल से सैक्युलर शब्द को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी. याचिका में कहा गया, '1976 में 42वें संशोधन के जरिए संविधान में सैक्युलर शब्द जोड़ा गया और इस बदलाव पर संसद में कभी बहस नहीं हुई, इस वजह से सैक्युलर शब्द को संविधान की प्रस्तावना से हटा देना चाहिए.'

सुप्रीम कोर्ट में 20 अक्तूबर, 2024 को कौन्स्टिट्यूशन के प्रियम्बल से सैक्युलर शब्द हटाने की मांग वाली इस याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा, "इस अदालत ने कई फैसलों में माना है कि सेक्युलरिज्म हमेशा से संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा रहा है. अगर संविधान में समानता और बंधुत्व शब्द का इस्तेमाल किया गया है तो यह स्पष्ट संकेत है कि सेक्युलरिज्म संविधान की मुख्य विशेषता है."

2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से ही सैक्युलर होने पर या सेक्युलरिज्म शब्द पर गहरी आपत्तियां दर्ज की जाती रही हैं. इस का कारण यह है कि बीजेपी हिंदुत्व की राजनीति करती है. बीजेपी इस देश के 80 फीसदी लोगों को हिंदू मानती है और इस बड़ी आबादी को वोटबैंक के रूप में हथियाने की कोशिश करती है.

इस के लिए वह हर हथकंडा अपनाती है जिस से 80 प्रतिशत हिंदुओं को बाकी के धर्मों से अलग किया जा सके. यही वजह है कि सैक्युलरिज्म शब्द बीजेपी की राजनीति में फिट नहीं बैठ पाता. इसीलिए बीजेपी ‘सेक्युलर' शब्द को गाली की तरह इस्तेमाल करती है और समयसमय पर कौन्स्टिट्यूशन के प्रियम्बल से ही इस शब्द को हटाने का प्रोपगंडा करती नजर आती है.

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