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भाई-बहनों में झगड़े-विकास में साधक या बाधक

January 2025

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Sadhana Path

भाई-बहनों में झगड़े-लड़ाई होना तो बेहद आम बात है और हर घर की कहानी है। भले उनमे एक-दो साल का अंतर हो या फिर छह-सात साल का, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इन झगड़ों में उनका प्यार भी छुपा होता है और तकरार भी। और कई बार बच्चे जिंदगी के जरूरी सबक भी इन झगड़ों से ही सीरव जाते हैं।

- सुशील सरित

भाई-बहनों में झगड़े-विकास में साधक या बाधक

घर में बच्चे हों और उनमें आपस में लड़ाई-झगड़ा ना हो, यह तो लगभग असंभव सी बात है और झगड़ों के लिए कोई खास मुद्दा होना भी जरूरी नहीं है। भाई-बहनों में अगर ज्यादा अंतराल हो तब तो दिन भर धमाचौकड़ी मची ही रहती है और अगर उनमें उम्र का चार-पांच साल का अंतर हो तो भी झगड़े हो ही जाते हैं। आमतौर पर ऐसे झगड़े कुछ ही देर में अपने आप शांत भी हो जाते हैं, लेकिन कभी-कभी यह गंभीर मोड़ भी ले लेते हैं और कभी-कभी यह इतने स्थाई हो जाते हैं कि इनका असर ताउम्र रहता है।

जैसा हमने पहले कहा, झगड़ों के पीछे कोई बहुत बड़ा कारण नहीं होता। बच्चे खेल रहे हैं, अब छोटे भाई या बहन को चोट लग गई। और उसे लगा कि बड़े कि इसमें गलती है। तो झगड़ा शुरू। एक ने होमवर्क जल्दी कर लिया और दूसरा नहीं कर पाया, पहले ने चिढ़ा दिया, देख तू तो फिसड्डी है, मैंने कितनी जल्दी सब कर डाला, दूसरे ने चिढ़कर उसकी कॉपी फाड़ दी, बस झगड़ा शुरू। किसी ने कहा देख गुड्डू मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, दूसरा बोला नहीं, वह मेरा पक्का दोस्त है, बहस हुई और झगड़ा शुरू। एक ने फ्रिज से निकाल कर चुपचाप मिठाई खाली, दूसरे ने देख लिया और मां से जाकर चुगली कर दी, जाहिर है कि मां डांटेगी, बस झगड़ा शुरू।

अगर दोनों बराबर के होते हैं तो मार-कुटाई, छीना-झपटी और शर्ट फटने तक नौबत आ जाती है और अगर एक बड़ा और दूसरा उससे चार-पांच साल छोटा होता है, तो बड़ा पिटाई कर देता है और छोटा रो-रो कर, चिल्ला-चिल्ला कर घर सर पर उठा लेता है।

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