يحاول ذهب - حر
चाय और छिपकली
December First 2024
|Champak - Hindi
पार्थ के पापा को चाय बहुत पसंद थी और वे दिन भर कई कप चाय पीने का मजा लेते थे. पार्थ की मां चाय नहीं पीती थीं. जब भी उस के पापा चाय पीते थे, उन के चेहरे पर अलग खुशी दिखाई देती थी.
पार्थ भी अपने पापा की तरह स्टाइलिश तरीके से कप पकड़ना चाहता था और एक खूबसूरत कप में गरम चाय पीना चाहता था.
मां ने उससे कहा था कि चाय पीने के लिए बड़ा होना पड़ता है. पार्थ को तो यह भी नहीं पता था कि चाय का स्वाद कैसा होता है.
वह अपनी मां से हर दिन कई बार चाय पीने की इजाजत मांगता था. वह इतना छोटा था कि उसे चाय पीने की अनुमति नहीं थी.
हालांकि उस के पापा ने उस की मां से अनुरोध किया कि वह इसे चाय पी कर आजमाने दे, लेकिन केवल दिन में एक बार.
अगले दिन पार्थ की मां ने उसे एक छोटा सा सिरेमिक कप उपहार में दिया, जिस में मुश्किल कुछ चम्मच चाय आ पाती थी. पार्थ को अपने छोटे से कप से चाय पीने में खुशी महसूस हुई, हालांकि उसे दिन में सिर्फ एक बार ही चाय पीने की अनुमति थी.
एक साल बाद पार्थ चौथी कक्षा में पढ़ने लगा और उसे अब चाय पसंद नहीं थी.
दिसंबर में एक सप्ताहांत पर पार्थ अपनी मां के साथ अपने दादा दादी से मिलने गया. उस ने वहां अपने परिवार के साथ खूब मौजमस्ती की और अपने दादा के साथ बैडमिंटन खेला. जब पार्थ और उसकी मां घर लौटे, तो उस के पापा ने उसे एक सुंदर साइकिल देकर हैरान कर दिया. वह बहुत खुश हुआ और साइकिल ले कर पूरे ब्लौक में घूमने के लिए तैयार हो गया.अचानक उन्होंने ऊपर के बेडरूम से पार्थ की मां की चीख सुनी. पार्थ और उस के पापा डर कर भागे और देखा कि उसकी मां रो रही हैं. रोते हुए मां ने बताया, "एक बड़ी सी मोटी छिपकली कप के नीचे की चाय पी रही थी, उस का पूरा शरीर अंदर था और सिर्फ पूंछ बाहर निकली हुई थी, उफ, मुझे उल्टी आने जैसा लग रहा है."
पार्थ के पापा खिलखिला कर हंसे और बोले, “तुम्हें गलतफहमी हुई होगी. छिपकली कभी चाय पीती है क्या?"
उस की मां ने जवाब दिया, "मैं ने सचमुच उसे देखा था, केवल उस की पूंछ बाहर थी. जब उस ने मुझे देखा, तो भाग गई."

هذه القصة من طبعة December First 2024 من Champak - Hindi.
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