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वीर्यरक्षा के ये उपाय अनमोल, जो आजमाता वह होता निहाल
Rishi Prasad Hindi
|October 2025
बहुत सारी बीमारियाँ साधन को (शरीर आदि को) 'मैं' मानने से होती हैं ।
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योगाभ्यास अथवा साधना में सफल होने के लिए ब्रह्मचर्य की परम आवश्यकता बताते हुए भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं:
प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः । मनः संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः॥
'योगी को प्रशांतचित्त, निर्भय, ब्रह्मचारी के व्रत में स्थित हो के और मन को संयत करके मेरे ही में चित्त लगाकर एवं मुझको ही अपना परम पुरुषार्थ समझते हुए योगयुक्त हो के बैठना चाहिए।'
(गीता : ६.१४)
अब ब्रह्मचर्य-व्रत की बात आती है तो एक तो ब्रह्म में चित्त विचरण करे उसका नाम भी ब्रह्मचर्य है। दूसरा कि तुम्हारे शरीर की जो ७वीं धातु है, जिसे वीर्य कहते हैं, उसकी रक्षा करना भी ब्रह्मचर्य है।
तो वीर्यरक्षा के कुछ उपाय हैं :
(१) जो तली हुई चीजें खाते हैं, ज्यादा मिर्च खाते हैं अथवा जो चाय-कॉफी खाली पेट पीते हैं या ज्यादा पीते हैं उन लोगों का वीर्य पतला हो जाता है। तो इन चीजों से बचा जाय । चाय-कॉफी तो वैसे भी हानि करती है लेकिन खाली पेट तो दुश्मन को भी नहीं पिलानी चाहिए।
Bu hikaye Rishi Prasad Hindi dergisinin October 2025 baskısından alınmıştır.
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