Facebook Pixel समाजसेवा व परदुःखकातरता की जीवंत मूर्ति | Rishi Prasad Hindi - religious-spiritual - Bu hikayeyi Magzter.com'da okuyun

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समाजसेवा व परदुःखकातरता की जीवंत मूर्ति

Rishi Prasad Hindi

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December 2024

२५ दिसम्बर को मदनमोहन मालवीयजी की जयंती है। मालवीयजी कर्तव्यनिष्ठा के आदर्श थे। वे अपना प्रत्येक कार्य ईश्वर-उपासना समझकर बड़ी ही तत्परता, लगन व निष्ठा से करते थे। मानवीय संवेदना उनमें कूट-कूटकर भरी थी।

समाजसेवा व परदुःखकातरता की जीवंत मूर्ति

दूसरों के दुःख दूर करने में वे अपनी तकलीफों का खयाल नहीं रखते थे। उनके जीवन के निम्नलिखित प्रसंग उनके इन सद्गुणों को प्रदर्शित करते हैं :

उनका जीवन-प्राण

समाजसेवा मालवीयजी का जीवन-प्राण थी। वे लोगों की सेवा व सहायता निःस्वार्थ भाव से करते थे। लोगों की सेवा के लिए ही उन्होंने वर्ष १९१४ में प्रयाग में सेवा-समिति की स्थापना की थी। सेवा समिति की स्थापना के मूल में दुःखग्रस्त प्राणियों का कष्ट दूर करने की भावना थी।

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सांस्कृतिक सम्पत्ति-विनाशक विकास-कार्यों से सांस्कृतिक सम्पत्ति की सुरक्षा होनी चाहिए : यूनेस्को

योगी अरविंदजी कहते थे : ''जब यह कहा जाता है कि भारत विस्तार करेगा और अपने को व्यापक बनायेगा तब उसका अर्थ यह है कि सनातन धर्म स्वयं का विश्व में विस्तार और फैलाव करेगा।

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अद्भुत है भगवत्कथा-सत्संग की महिमा

कथा त्रिवेणी संगम... ... नेणे वर्णं या सुखां ॥

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इसमें हानि-लाभ किसका ?

यह संक्षिप्त जीवन-चरित्र है उनका जिन्हें विश्व संत श्री आशारामजी बापू के नाम से जानता है ।

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इन ६ गलतियों से बचेंगे तो स्वास्थ्य में लगेंगे ४ चाँद व छक्के

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अद्वितीय वैश्विक क्रांति का जन्म

संतत्व को पाये हुए अपने शिष्य को साँईं लीलाशाहजी ने डीसा में एक कुटीर में रहने की आज्ञा दी ।

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April 2026

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महान लक्ष्य और हिमालय-सी अडिगता

इन बालक का भगवद्भक्ति की और गहरा झुकाव था। खेलने-कूदने की उम्र में ये घंटों तक ईश्वर के ध्यान, चिंतन में तल्लीन हो जाते ।

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अर्धांगिनी की धर्मशक्ति

जो स्वार्थरहित सेवा करते हैं, भगवान और समाज के बीच सेतु बनते हैं वे कर्मयोगी हो जाते हैं ।

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April 2026

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किया हुआ सत्संग व्यर्थ नहीं जाता

एक शिष्य रहता था गुरुजी के पास।

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April 2026

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विलक्षण दूरदर्शिता

आज राष्ट्रीय या वैश्विक स्तर पर ऐसी कई समस्याएँ हैं जिनको बड़ी चुनौती समझा जा रहा है अथवा कुछ ऐसी हैं कि गम्भीर होते हुए भी जिनका संज्ञान ही नहीं लिया जा रहा है, उनका प्रायोगिक एवं सशक्त समाधान इन संत ने वर्षों पूर्व ही दे दिया था।

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April 2026

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१००० मेहमानों को दिलायी ऋषि प्रसाद की पंचवार्षिक सदस्यता

उपहार में दिया दिव्य ज्ञान

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April 2026

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