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समाजसेवा व परदुःखकातरता की जीवंत मूर्ति
Rishi Prasad Hindi
|December 2024
२५ दिसम्बर को मदनमोहन मालवीयजी की जयंती है। मालवीयजी कर्तव्यनिष्ठा के आदर्श थे। वे अपना प्रत्येक कार्य ईश्वर-उपासना समझकर बड़ी ही तत्परता, लगन व निष्ठा से करते थे। मानवीय संवेदना उनमें कूट-कूटकर भरी थी।
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दूसरों के दुःख दूर करने में वे अपनी तकलीफों का खयाल नहीं रखते थे। उनके जीवन के निम्नलिखित प्रसंग उनके इन सद्गुणों को प्रदर्शित करते हैं :
उनका जीवन-प्राण
समाजसेवा मालवीयजी का जीवन-प्राण थी। वे लोगों की सेवा व सहायता निःस्वार्थ भाव से करते थे। लोगों की सेवा के लिए ही उन्होंने वर्ष १९१४ में प्रयाग में सेवा-समिति की स्थापना की थी। सेवा समिति की स्थापना के मूल में दुःखग्रस्त प्राणियों का कष्ट दूर करने की भावना थी।
Bu hikaye Rishi Prasad Hindi dergisinin December 2024 baskısından alınmıştır.
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