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स्वच्छ ऊर्जा में विश्व को राह दिखाता भारत
Dainik Jagran
|July 24, 2025
नवीकरणीय ऊर्जा के मोर्चे पर भारत की सफलता दर्शाती है कि यदि वह इससे संबंधित बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है तो दुनिया भी उस दिशा में आगे बढ़ सकती है
जलवायु परिवर्तन की निरंतर विकराल होती चुनौती के बीच स्वच्छ ऊर्जा की ओर कदम बढ़ाने को लेकर कोई दुविधा नहीं। इसके बावजूद यह चर्चा जीवाश्म ईंधन और रिन्यूएबल एनर्जी यानी नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर अनावश्यक द्वंद्वों में फंसी है। इसमें ऊर्जा परिदृश्य पर संक्रमण की जटिलता को अनदेखा किया जा रहा है और यह स्थिति ग्लोबल साउथ यानी विकासशील या उभरती हुई अर्थव्यवस्था में अधिक देखने को मिल रही है। आवश्यकता जीवाश्म ईंधनों को पूरी तरह से त्यागने की नहीं, बल्कि उन पर निर्भरता घटाने की एक संतुलित नीति एवं गैर-जीवाश्म ईंधनों में रणनीतिक निवेश बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ने की है। सौर, पवन, जल, परमाणु और जैव ऊर्जा में निवेश इस रणनीति के मूल में होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि बीते एक दशक में सौर एवं पवन ऊर्जा की लागत 80 प्रतिशत से भी अधिक घट गई है। इसके चलते कई क्षेत्रों में सौर- पवन ऊर्जा की लागत कोयले और गैस से बनने वाली बिजली से भी किफायती हो गई है। नवीकरणीय ऊर्जा कीमतों में स्थायित्व प्रदान करने के साथ ही ऊर्जा स्वतंत्रता भी सुनिश्चित करती है। एक बार इंस्टाल होने के बाद उसमें लागत लगभग नगण्य रह जाती है। ये कुछ ऐसे लाभ हैं जिनकी जीवाश्म ईंधन कभी बराबरी कर ही नहीं सकते। ऐसी क्षमताओं से भू-राजनीतिक गतिरोधों से भी सहजतापूर्वक निपटा जा सकता है, क्योंकि ऊर्जा समृद्ध क्षेत्रों में तनाव भड़कने से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो जाती है। रूस यूक्रेन युद्ध इसका बड़ा उदाहरण रहा। स्वच्छ घरेलू ऊर्जा में निवेश करने वाले देश ऐसी अस्थिरता से बचे रह सकते हैं। जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना इसलिए और अनिवार्य हो गया है कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में अकेले जीवाश्म ईंधनों की हिस्सेदारी करी
Bu hikaye Dainik Jagran dergisinin July 24, 2025 baskısından alınmıştır.
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