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बुलंद और बेलगाम
India Today Hindi
|January 21, 2026
ट्रंप के भारी उथल-पुथल भरे कदमों के बावजूद देश में चुनावी जीत से उत्साहित प्रधानमंत्री मोदी ने सुधारों की एक्सप्रेस की रफ्तार तेज की
वर्ष 2025 की शुरुआत में नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप, दोनों की मजबूरियां काफी हद तक एक जैसी थीं. दोनों को ऐसे मजबूत नेताओं के तौर पर देखा जा रहा था, जिन्होंने अपने-अपने देशों में अब तक की राजनीति से अलग रास्ता चुना था. उम्र के सात दशक पार कर चुके इन दोनों नेताओं के लिए सवाल अब सिर्फ राजनैतिक वजूद कायम रखने का नहीं था, बल्कि ऐसी विरासत छोड़ने का था जो टिकाऊ भी हो और असरदार भी.
पचहत्तर साल के मोदी ने 2024 के आम चुनाव में तीसरी बार लगातार जीत हासिल कर इतिहास रच दिया. इस तरह वे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड के बराबर आ गए. लेकिन एक अहम फर्क था. नेहरू के दौर की कांग्रेस के उलट, मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तीसरे कार्यकाल में लोकसभा में अपने दम पर बहुमत नहीं मिला. पार्टी को 543 में से 240 सीटें मिलीं, यानी जरूरी 272 के आंकड़े से 32 कम. प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के दस साल के कार्यकाल में यह पहला मौका था जब उनको सरकार बनाने के लिए अपने प्रमुख सहयोगियों पर निर्भर होना पड़ा. आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और बिहार में नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) या जद (यू) के सहारे ही एनडीए सरकार बनी. माना जा रहा था कि इससे मोदी की बड़े और निर्णायक सुधार करने की क्षमता सीमित हो सकती है लेकिन 2025 में मोदी ने इस सियासी झटके को अपने रास्ते में नहीं आने दिया. उन्होंने ऐसे सुधारों की शुरुआत की, जिनका मकसद देश को विकसित भारत के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ाना था. लक्ष्य साफ थाः आजादी के 100वें साल में 2047 तक भारत को विकसित देशों की चुनिंदा कतार में खड़ा करना.
Bu hikaye India Today Hindi dergisinin January 21, 2026 baskısından alınmıştır.
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