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कमान ज़मीनी नेता के हाथों में
DASTAKTIMES
|January 2026
भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड ने बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर सबको चौंका दिया है।
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पटना स्थित भाजपा दफ्तर में ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न तो मना, लेकिन राजनीतिक गलियारों में असली चर्चा इस फैसले के पीछे की 'रणनीति' को लेकर है। पार्टी भले ही इसे संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक कौशल का सम्मान बता रही हो, लेकिन इस नियुक्ति का समय, राजनीतिक संदर्भ और इसके निहितार्थ इसे एक साधारण पदोन्नति से कहीं अधिक, एक सोची-समझी रणनीतिक पहल की ओर इशारा कर रहे हैं। दस्तक टाइम्स के लिए पटना से आलोक मोहित की रिपोर्ट।
ऐसे समय में जब बीजेपी अपने नेतृत्व ढांचे को नए सिरे से गढ़ रही है, कई राज्यों में होने वाले अहम विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर सहयोगी दलों के साथ संतुलन साधने में जुटी है, नितिन नबीन की यह पदोन्नति न केवल परंपरा से हटकर है, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक इरादे का संकेत भी है- खासकर बिहार की सियासत के लिहाज से। 45 साल के नितिन नबीन का बीजेपी के सबसे प्रभावशाली संगठनात्मक पदों में से एक तक पहुंचना पहली नज़र में हैरान करता है। आमतौर पर बीजेपी का राष्ट्रीय नेतृत्व या तो बहुत अनुभवी दिग्गजों को तरजीह देता है या फिर उन चेहरों को जिनकी पूरे देश में पहचान हो। नितिन नबीन इस पैमाने पर थोड़े अलग दिखते हैं। उनका आधार अभी बिहार तक है और वे शोर-शराबे वाले मास मोबिलाइज़र नेता की बजाय जमीन पर चुपचाप काम करने वाले प्रशासक माने जाते हैं।
लेकिन बीजेपी की अंदरूनी राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया। पिछले दो दशकों में नितिन नवीन ने दो चीजें साबित की हैं। बधाई संदेश इस संदर्भ में खास तौर पर उल्लेखनीय रहा। मोदी ने उन्हें 'मेहनती कार्यकर्ता' और 'जमीनी नेता' कहकर जो बधाई दी, वह साफ करती है कि पार्टी अब भारी-भरकम भाषणों से ज्यादा अनुशासन और काम करने की क्षमता को तवज्जो दे रही है।
राजनीति में एक संयोगवश प्रवेश
Bu hikaye DASTAKTIMES dergisinin January 2026 baskısından alınmıştır.
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