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पलायन व पर्यावरण की चिंता नहीं बना मुद्दा

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June 2024

उत्तराखंड में वर्तमान में नगरीय क्षेत्रों की संख्या 102 है। इनमें नौ नगर निगम और शेष नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत हैं। इसके अलावा लगभग आठ नए नगरीय क्षेत्रों के लिए निकायों के गठन की प्रक्रिया गतिमान है। राज्य के इन शहरों की तस्वीर पर नजर दौड़ाएं तो यह अनियोजित विकास की मार से अछूते नहीं है। पहाड़ के गांवों से पलायन के चलते इन शहरों पर जनदबाव अत्यधिक है।

पलायन व पर्यावरण की चिंता नहीं बना मुद्दा

उत्तराखंड में परिणाम आने के बाद एक बड़ी बात सामने आई है। भाजपा ने राष्ट्रीय मुद्दों को ही तवज्जो दी तो वहीं कांग्रेस इनकी काट ढूंढने का प्रयास किया था। हालांकि कांग्रेस को इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली और एक बार फिर उसे पांच साल का इंतजार करना पड़ेगा। कांग्रेस ने काफी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। हैरानी की बात यह है कि यहां पर कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनको किसी भी दल ने नहीं उठाया। आइए देखते हैं उत्तराखंड के कौन-कौन से मुद्दे थे जिनको राजनीतिक दलों ने पूरी तरह से उपेक्षित छोड़ दिया। लोकसभा चुनाव का प्रचार अभियान नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद लगभग दो सप्ताह का ही रहा, लेकिन इस दौरान प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों ने मतदाताओं से संपर्क साधने को ऐड़ी चोटी का जोर लगाए रखा। रैली, सभाएं, रोड शो, छोटी-छोटी बैठकें, हर क्षेत्र के प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क, जनसंपर्क के माध्यम से प्रत्याशियों ने अपनी बात मतदाताओं के समक्ष रखी। उन्हें रिझाने के लिए उन्होंने तमाम मुद्दे उछाले, इनके समाधान को अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। हर दुख तकलीफ में साथ रहने का वादा किया। मतदाताओं ने सभी की बात सुनी, लेकिन राज्य से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर नेताओं की चुप्पी ने उन्हें हैरत में भी डाला। ऐसे ही कुछ मुद्दों पर नजर दौड़ाते हैं।

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बिहार के लिए नबीन के मायने

बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन की 23 दिसंबर की पहली बिहार यात्रा औपचारिक रूप से सम्मान समारोह के रूप में प्रस्तुत की गई। लेकिन राजनीतिक तौर पर यह एक सोचा-समझा कदम था जिसका मकसद उनकी सोच, संगठन की प्राथमिकताओं, नेतृत्व शैली और राजनीतिक मिज़ाज को दिखाना था। पटना हवाई अड्डे से लेकर मिलर स्कूल मैदान तक, जहां सम्मान समारोह आयोजित किया गया था, हर दृश्य संतुलित था, उत्सव था, लेकिन शोर-शराबा नहीं, प्रमुखता थी, लेकिन आत्मप्रदर्शन नहीं।

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राम कृपा नासहिं सब रोगा

प्रत्येक मानव के भीतर परमात्मा की अखण्ड सत्ता विद्यमान है और वही सारी शक्ति, आनन्द, ज्ञान और प्रेम का स्रोत है। भोजन से शक्ति, धन से सुख, पुस्तकों से ज्ञान और सम्बन्धियों से अपनत्व मानना ही इस सत्ता का निरादर एवं पाप है जिसका परिणाम रोग, वियोग, मलिनता और आवागमन है। श्रीमानस में दुःख को पाप का परिणाम कहा गया है।

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