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माफियाओं की मौत पर 'ब्लेम गेम' की राजनीति
DASTAKTIMES
|May 2023
लब्बोलुआब यह है कि अपराधियों के लिए तमाम राजनैतिक दलों द्वारा घड़ियाली आंसू बहाना कोई नया नहीं है, क्योंकि अक्सर इन्हीं अपराधियों के सहारे राजनेता विधान सभा और लोकसभा की सीढ़िया चढ़ने लायक 'ताकत' जुटा पाते हैं। ऐसे में इन अपराधियों को संरक्षण देना ऐसे नेताओं की मजबूरी बन जाती है। इसीलिए अपराधियों की मौत पर हमारे नेतागण अपने हिसाब से जनता के समाने अपराधी की हकीकत बयां करते हैं। एक तरह माफियाओं के सहारे राजनीति चमकाने की कोशिश करने वाले नेताओं द्वारा समय-समय पर अपराधियों के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने का 'ब्लेम गेम' यानी आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेला जाता है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजकल माफिया और मुठभेड़ पर गरमा-गरम बहस छिड़ी हुई है। तमाम राजनैतिक दलों के बयान बहादुरों की तो सुबह ही इसी बहस से शुरू और शाम को इसी पर खत्म हो जाती है। वैसे तो यूपी में माफियाओं और अपराधियों की लम्बी-चौड़ी लिस्ट मौजूद है, लेकिन नेतानगरी में चंद माफियाओं के नाम ही सुर्खियों में दिखाई देते हैं। योगी सरकार का बुलडोजर इन्हीं चंद माफियाओं के खिलाफ सबसे अधिक गरजता है । इसमें सबसे प्रमुख नाम अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी है गैंग का है। अतीक गैंग के मुखिया अतीक अहमद और गैंग में नंबर दो की हैसियत रखने वाला उसका भाई अशरफ शूटआउट में मारे जा चुके हैं तो यूपी का नया डॉन बनने का सपना देख रहा अतीक का एक बेटा असद फरारी के दौरान पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। अतीक की फरार चल रही पत्नी शाइस्ता परवीन भी इनामी अपराधी घोषित की जा चुकी हैं। कुल मिलाकर अतीक अहमद गैंग करीबकरीब मिट्टी में मिल चुका है। इस गैंग में जो कुछ सदस्य बच गए हैं, वह जान बचाकर भागे-भागे फिर रहे हैं। अतीक के बाद मुख्तार अंसारी गैंग के खिलाफ योगी सरकार सबसे अधिक उग्र नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त तेवरों से जेल में बंद मुख्तार अंसारी के होश फाख्ता हैं।
Bu hikaye DASTAKTIMES dergisinin May 2023 baskısından alınmıştır.
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