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उत्तराखण्ड विकास मॉडल की भी होने लगी चर्चा

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January 2023

प्रदेश की धामी सरकार का लक्ष्य राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर साल 2025 तक उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने पर है। चिंतन शिविर में मिले 25 सुझावों को मूर्त रूप देने को कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। संबंधित विभागों को इन सुझावों पर कार्ययोजना प्रस्तुत करने के लिए तीन माह का अधिकतम समय दिया गया है।

- गोपाल सिंह पोखरिया

उत्तराखण्ड विकास मॉडल की भी होने लगी चर्चा

नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के तीन बार मुख्यमंत्री रहते हुए विकास का जो मॉडल देश के सामने प्रस्तुत किया, वह आज भी गुजरात मॉडल के नाम से जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश से अलग होकर पृथक राज्य बने विषयक भौगोलिक क्षेत्र वाले उत्तराखण्ड को भी विकास के मॉडल के रूप में देश और दुनिया के समक्ष रखने का प्रण लेने वाले युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वर्तमान में दिन-रात एक किए हुए हैं। उन्होंने मंत्रिमण्डल के अपने सहयोगियों से लेकर अधिकारियों के बीच अपनी मंशा साफ कर दी है कि उन्हें उत्त-राखण्ड को किस ऊंचाइयों तक ले जाना है। इस दिशा में उनकी सक्रियता को देखते हुए बीते दिनों जब एक मीडियाकर्मी ने उन पर तंज कसते हुए अनौपचारिक रूप से यानि 'ऑफ द रिकार्ड' कहा कि यह सब जो आप कर रहे हैं उसके पीछे 2024 में होने वाला लोकसभा चुनाव ही है और इसके अतिरिक्त कुछ नहीं। इस पर मुख्यमंत्री धामी द्वारा दिया गया उत्तर चुनाव और राजनीति से इतर अपने राज्य उत्तराखण्ड के लिए प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि 'चुनाव चाहे 2024 का हो या फिर कोई और, मैं जनता के बीच अपने कामों को लेकर ही जाऊंगा और परिणाम आप देख लीजिएगा।'

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बिहार के लिए नबीन के मायने

बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन की 23 दिसंबर की पहली बिहार यात्रा औपचारिक रूप से सम्मान समारोह के रूप में प्रस्तुत की गई। लेकिन राजनीतिक तौर पर यह एक सोचा-समझा कदम था जिसका मकसद उनकी सोच, संगठन की प्राथमिकताओं, नेतृत्व शैली और राजनीतिक मिज़ाज को दिखाना था। पटना हवाई अड्डे से लेकर मिलर स्कूल मैदान तक, जहां सम्मान समारोह आयोजित किया गया था, हर दृश्य संतुलित था, उत्सव था, लेकिन शोर-शराबा नहीं, प्रमुखता थी, लेकिन आत्मप्रदर्शन नहीं।

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राम कृपा नासहिं सब रोगा

प्रत्येक मानव के भीतर परमात्मा की अखण्ड सत्ता विद्यमान है और वही सारी शक्ति, आनन्द, ज्ञान और प्रेम का स्रोत है। भोजन से शक्ति, धन से सुख, पुस्तकों से ज्ञान और सम्बन्धियों से अपनत्व मानना ही इस सत्ता का निरादर एवं पाप है जिसका परिणाम रोग, वियोग, मलिनता और आवागमन है। श्रीमानस में दुःख को पाप का परिणाम कहा गया है।

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