ममता बनर्जी से दीदी तक का सफर
Grihshobha - Hindi|April First 2021
राजनीति में जहां आज रूतबा और पैसा है, वहीं ममता की सादगी ही उन की पहचान है. ममता से दीदी और फिर मुख्यमंत्री बनने का उन का सफर बेहद रोचक है...
सोनाली

नीले बौर्डर वाली सफेद साड़ी और पैरों में हवाई चप्पल पहने एक महिला जिस का जन्म कोलकाता के बहुत ही गरीब परिवार में हुआ, बाद में जा कर कोलकाता की मुख्यमंत्री बनती है. चेहरे पर एक अलग सा तेज और बातों से एकदम साफ और कड़क. जो अपने सादे जीवन में और अपने मुखर स्वभाव के लिए ही राजनीति में जानी जाती है. अपने नाम के बजाय दीदी के नाम से संबोधित की जाती है. जी हां, हम बात कर रहे हैं ममता बनर्जी की.

ममता बनर्जी का बचपन

ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी, 1955 को कोलकाता में हुआ था. ममता के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और जब वे बहुत छोटी थीं, तभी उन की मृत्यु हो गई. बताया जाता है कि गरीब परिवार से होने के कारण उन्हें अपने छोटे भाईबहन का पालनपोषण करने के लिए अपनी मां के काम में हाथ बंटाना पड़ता था. यहां तक कि उन्हें दूध बेचने का काम भी करना पड़ा.

पढ़ाई और डिगरियां

ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के जोगमाया देवी कालेज से इतिहास की डिगरी ली है. इस के बाद उन्होंने इसलामिक इतिहास में मास्टर डिगरी कोलकाता विश्वविद्यालय से ली. इस के बाद श्रीशिक्षायतन कालेज से बीए की और कोलकाता स्थित जोगेश चंद्र चौधरी कालेज से कानून की पढ़ाई की और फिर राजनीति में अपने कदम को इतनी मजबूती से जमाया कि आज पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के कद का किसी भी पार्टी में कोई भी नेता नहीं है.

कम उम्र से राजनीतिक कैरियर की शुरुआत

70 के दशक में मात्र 15 साल की उम्र में कांग्रेस पार्टी से जुड़ने वाली ममता बनर्जी ने सब से पहले एक पदाधिकारी के रूप में 1976 में अपना काम संभाला. इस दौरान वे 1975 में पश्चिम बंगाल में महिला कांग्रेस (आई) की जनरल सेक्रेटरी नियुक्त की गईं. इस के बाद 1978 में ममता कोलकाता दक्षिण की जिला कांग्रेस कमेटी (आई) की सैक्रेटरी बनीं. 1984 में ममता ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के वरिष्ठ नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर लोक सभा सीट से हराया. उस के बाद उन्हें देश की सब से युवा सांसद बनने का गौरव प्राप्त हुआ. इस के बाद 1991 में वे दोबारा लोक सभा की सांसद बनीं और इस बार उन्हें केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग में राज्यमंत्री भी बनाया गया.

साल 1991 में जब नरसिम्हा राव की सरकार बनी तब उन्हें मानव संसाधन विकास, युवा मामले और खेल के साथ ही महिला और बाल विकास राज्य मंत्री भी बनाया गया. खेल मंत्री के तौर पर उन्होंने देश में खेलों की दशा सुधारने को ले कर सरकार से मतभेद होने पर इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. इस वजह से 1993 में उन्हें इस मंत्रालय से छुट्टी दे दी गई.

टीएमसी का गठन

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