लक्षद्वीप को डुबोने की तैयारी
Sarita|September First 2021
लक्षद्वीप अचानक चर्चा में है और वहां के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल विवादों में. पटेल लक्षद्वीप को मालदीव की तर्ज पर पर्यटन स्थल में परिवर्तित करना चाहते हैं मगर द्वीप के ईकोसिस्टम से बेपरवाह जो प्रस्ताव ले कर वे आए हैं उस से लक्षद्वीप का अस्तित्व और उस के निवासियों का जीवन संकट में है.
नसीम अंसारी कोचर

बचपन में मेरी नानी मुझे बताती थी कि हम लोग मूंगे की चट्टानों पर बसे हैं. मूंगा जो हमारे द्वीप की मिट्टी के नीचे है और पूरे द्वीप को अपने ऊपर संभाले हुए है. नानी कहती थी कि जिस दिन मूंगा नहीं रहेगा, उस दिन हम भी नहीं रहेंगे. मूंगे की इन मजबूत चट्टानों से ही लक्षद्वीप का पूरा ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) बना है. नानी की बातें अब मुझे डराती हैं क्योंकि मूंगा धीरेधीरे खत्म हो रहा है. मूंगे से बनी प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ) सिकुड़ रही हैं.

'मुझे याद है, मेरे बचपन में मूंगे के छोटेबड़े टुकड़े जब बह कर किनारे पर आते थे तो हम दोनों भाई उन्हें घर की दीवारें बनाने के लिए इकट्ठा करते थे. उन को कूट कर उसी मिट्टी से घर बनाते थे. अब्बा बड़ी सी नाव में मछलियां पकड़ते थे. कभीकभी वे मुझे अपने साथ ले जाते थे. जिस दिन टूना मछली फंस गई वह दिन अब्बा अपना लकी डे मानते थे. क्योंकि टूना बड़ी मछली है और काफी महंगी बिकती है. मछली पकड़ना हमारा पारिवारिक पेशा है. हम 2 भाई उच्च शिक्षा ले कर बाहर निकल आए, सरकारी नौकरियों में लग गए मगर परिवार के बाकी सदस्य अभी भी लक्षद्वीप में बितरा द्वीप पर ही रहते हैं.' दिल्ली के लक्षद्वीप भवन में ठहरे अमानत खादर लक्षद्वीप के बारे में यों बताते हैं.

अमानत केरल में नौकरी करते हैं और काम के सिलसिले में दिल्ली आते रहते हैं. यहां वे अधिकतर लक्षद्वीप भवन में ही ठहरते हैं. लक्षद्वीप के बारे में उन से बातचीत में वे लक्षद्वीप के वर्तमान प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के रवैए व उन के कार्यों से नाराज दिखते हैं. उन का कहना है, "विकास के नाम पर इस समय जो कुछ लक्षद्वीप में हो रहा है वह पूरे द्वीप को बरबाद कर देगा.'

अमानत आगे कहते हैं, सरकार लक्षद्वीप को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करना चाहती है, मगर वहां के ईकोसिस्टम की समझ किसी को नहीं है. वहां की परिस्थितियों को समझे बगैर, वहां के लोगों को विश्वास में लिए बगैर, आप निर्माण कार्य कैसे कर सकते हैं?

"सौंदर्गीकरण के नाम पर मूंगे की चट्टानों को तोड़ा जाएगा. उस में सुराख किए जाएंगे. जलमहल बनाए जाएंगे. यह तो पूरे द्वीप को समुद्र में डुबो देगा. ये चट्टानें ही इस द्वीप को समुद्र की ताकतवर लहरों व तूफानों से बचाती हैं. अगर ये दरक गईं तो पूरा द्वीप समुद्र में समा जाएगा. फिर सरकार को वहां के निवासियों और उन के व्यवसाय के बारे में भी सोचना चाहिए. सौंदर्गीकरण और स्वच्छता के नाम पर समुद्र किनारे से हमारे शेड, नावें, मछलियां सुखाने की जगह खाली कराई जाएगी. सड़कें और पार्क बनाने के नाम पर हमारी जमीनें छीनी जाएंगी. जब वहां के निवासियों की रोजीरोटी, जमीन, व्यवसाय सब छिन जाएगा तो वे क्या करेंगे? कहां जाएंगे?"

मूंगा जो लक्षद्वीप की कहानियों, कल्पनाओं, जीवन, आजीविकाओं और पारिस्थितिक तंत्र का केंद्र है, धीरेधीरे समाप्त हो रहा है. इस के कारण लक्षद्वीप के ईकोसिस्टम में आ रहे परिवर्तनों को यहां के मछुआरे दशकों से देख रहे हैं. अनेक वैज्ञानिक यहां मूंगे की चट्टानों और इस से जुड़े पर्यावरण पर शोध कर रहे हैं. जलवायु परिवर्तन के चलते बीते 2 दशकों में लक्षद्वीप के समुद्र में मछलियों की संख्या में आश्चर्यजनक रूप में कमी आई है. अब यहां मछुआरों को अपनी नावें ले कर समुद में दूरदूर तक मछली की तलाश में जाना पड़ता है.

अमानत बताते हैं, "मछलियों की तलाश में लोग कईकई दिनों तक गायब रहते हैं, कभीकभी हफ्तों तक क्योंकि मूंगे की चट्टानें, जिन में चारा मछलियां पलती थीं और बड़ी मछलियां उन की तलाश में द्वीप के आसपास ही जमा रहती थीं, अब गायब हो रही हैं. वजह है जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के व्यवहार में परिवर्तन और इस से मूंगे की चट्टानों का लगातार टूटना व नष्ट होना."

शांत और सुरम्य द्वीप पर अशांति के बादल

अरब सागर में स्थित भारत का सब से छोटा केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप 36 द्वीपों का एक समूह है. यह भारत के तटीय शहर कोच्चि से करीब 220-440 किलोमीटर की दूरी पर है और कुल 32 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है. इस में 12 एटोल, 3 रीफ, 5 जलमग्न बैंक और 10 बसे हुए द्वीप हैं. लक्षद्वीप की राजधानी कवरत्ती है. यह द्वीपसमूह केरल उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है.

2011 की भारतीय जनगणना के अनुसार लक्षद्वीप की कुल जनसंख्या 64,473 थी जो अब बढ़ कर 70 हजार के आसपास पहुंच गई है. अधिकांश आबादी स्थानीय मुसलमानों की है और उन में से भी ज्यादातर सुन्नी संप्रदाय के शाफी से हैं. यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना और नारियल की खेती करना है, साथ ही टूना मछली का निर्यात भी किया जाता है.

इस केंद्रशासित प्रदेश में हर 7वां व्यक्ति मछुआरा है. मछली पकड़ना और नारियल की खेती करना यहां जीवनयापन के पारंपरिक साधन हैं. लेकिन लोग पढ़ेलिखे हैं. यहां 93 फीसदी साक्षरता है. हर द्वीप पर अच्छे स्कूल हैं. 4 कालेज भी हैं. युवा उच्चशिक्षा ग्रहण करने के बाद देश की मुख्य भूमि पर काम करने जाते हैं. लक्षद्वीप के लोगों का केरल के साथ गहरा संबंध है और वे मलयालम भाषा बोलते हैं. सिर्फ मिनिकाय में मालदीव की भाषा दिवेही बोली जाती है. यहां के लोग केरल पर निर्भर ही नहीं बल्कि केरल से ही अपनी पहचान मानते हैं.

लक्षद्वीप के लोग आपस में काफी घुलमिल कर रहते हैं. कोई भूखा नहीं रहता. स्वास्थ्य सेवाएं भी यहां अच्छी हैं. बीते कुछ सालों में परिवहन व्यवस्था भी बेहतर हुई है. लोगों को लाने व ले जाने के लिए अनेक जहाज चलते हैं. अगत्ती द्वीप से उड़ानें भी हैं. इस के अलावा हैलिकोप्टर सेवा भी है. मगर पर्यटन के लिहाज से लक्षद्वीप कोई आकर्षक जगह नहीं है.

यहां सब से बड़ा द्वीप 5 वर्ग किलोमीटर का है और सब से लंबा द्वीप एक छोर से दूसरी छोर तक मात्र 10 किलोमीटर है. पर्यटन सुविधाएं सिर्फ 3 द्वीपों तक ही सीमित हैं. बंगरम द्वीप वैसे तो पानी की कमी के कारण रहने के काबिल नहीं है लेकिन यहां एक खूबसूरत छोटा रिजौर्ट है. यहां के रहवासियों ने अपने द्वीप को काफी शांत, स्वच्छ और खूबसूरत रखा है. मगर अब इस की खूबसूरती पर दाग लगाने की तैयारी की जा रही है.

इस की शांत फिजाएं दर्द से चीखने को हैं क्योंकि केंद्र सरकार की ललचाई दृष्टि इस द्वीप पर जम गई है. एक सुरम्य द्वीप समूह पर विकास के नाम पर जो होने वाला है, वह यहां के पर्यावरण की बरबादी का दुस्वप्न है. केंद्र में भाजपा के सत्तासीन होने के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देशभर में अपना सांप्रदायिक एजेंडा चला रहा है. इसी कड़ी में मोदी सरकार का अगला निशाना अब लक्षद्वीप है. लक्षद्वीप में विकास और बदलाव के नाम पर तानाशाही के नएनए फरमान जारी किए जा रहे हैं.

यह तथाकथित विकास और उस के साथ कुछ और एजेंडे पिछले साल दिसंबर में केंद्र की तरफ से गुजरात के पूर्व गृहमंत्री प्रफुल्ल खोड़ा पटेल को लक्षद्वीप का प्रशासक नियुक्त करने के बाद से सामने आने शुरू हुए हैं. प्रफुल्ल खोड़ा दादर नगर हवेली के भी प्रशासक हैं. लक्षद्वीप को ले कर उन के प्रस्ताव काफी चौंकाने वाले हैं.

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