प्रतिभा के सदपयोग से जीवन सार्थक
Sarita|February First 2020
धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में आईएएस जैसे पदाधिकारी भी आएदिन अखबारों की सुर्खियां बनते हैं. पर हर आईएएस अफसर ऐसा नहीं होता है. कुछ ऐसे भी आईएएस अफसर होते हैं जो न सिर्फ पद की प्रतिष्ठा बनाए रखते हैं, बल्कि ईमानदारी का भी उदाहरण पेश करते हैं.
साधना श्रीवास्तव

आज ऐसी स्थिति देखसुन कर कि अनेक आईएएस अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित हो रहे हैं, मैं ने दांतों तले उंगली दबा ली. मुझे आश्चर्य होता है कि ऐसी बुद्धि के मालिक कि उन का चयन आईएएस जैसे मुश्किल व सम्माननीय पद के लिए हो जाता है, तो फिर उन की प्रतिभा को काठ क्यों मार जाता है. वे न केवल गलत कदम उठाने की सोचते हैं, बल्कि बढ़ा भी डालते हैं. इस वजह से मात्र उन की प्रतिष्ठा ही मटियामेट नहीं होती, बल्कि नौकरी से हाथ धोने की नौबत तक आ जाती है.

आईएएस अधिकारियों की ऐसी गलत सोच देखसुन कर मुझे अचानक 1968 के बैच के आईएएस डा. गिरीश चंद्र श्रीवास्तव और उन के कुछ बाद ही आईएएस बनीं उन की धर्मपत्नी रोली श्रीवास्तव का सम्मान के साथ स्मरण हो आया.

रोली अपने पति से कुछ जूनियर रहीं. जब से गिरीश चंद्र और रोली ने अपनाअपना पदभार संभाला, बहुत ही ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा से सरकार की सेवा करते रहे. इस से पहले कि उन के बारे में कुछ विशेष लिखू, संक्षिप्त में उन का परिचय देना जरूरी है.

गिरीश का जन्म उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में 1942 में हुआ था. संयोग से उस समय बस्ती के जिलाधिकारी कोई गिरीश चंद्र थे. उन की मां ने उन्हीं के नाम पर अपने बेटे का नाम गिरीश चंद्र रख दिया, यह सोच कर कि मेरा बेटा भी एक दिन आईएएस बनेगा, जो भविष्य में सत्य हो कर सामने आया भी. गिरीश बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के रहे. हाईस्कूल से ही एमएससी टौपर और स्कोलरशिप होल्डर रहे. 18 वर्ष की आयु में उन्होंने एमएससी जियोफिजिक्स बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से किया था. आईएएस में बैठने की अभी आयु न होने के कारण वे जियोलोजिकल सर्वे औफ इंडिया में 4 वर्ष फर्स्टक्लास गजटेड औफिसर के पद पर कार्यरत रहे. 22 वर्ष की आयु होने पर वे यूपीएससी एग्जाम में अपने पहले ही प्रयास में सफल हो गए.

Continue reading your story on the app

Continue reading your story in the magazine

MORE STORIES FROM SARITAView All

रोडरेज की समस्या

बढ़ते सड़क हादसों के साथ रोडरेज यानी रास्ते चलते झगड़ा, गालीगलौज और मारपीट करने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. रोड पर लोग छोटीछोटी बातों पर भी हिंसक होने लगे हैं. आखिर ऐसा क्यों?

1 min read
Sarita
January First 2021

ममता से बंगाल छीनने की ललक

ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर की कामयाबी पर उन के प्रतिद्वंदियों को रश्क होता है. आज ममता और बंगाल एकदूसरे के पर्याय हैं, जिस में सेंध लगाने की कोशिश हर राजनीतिक पार्टी कर रही है. फिर चाहे वह कांग्रेस हो, वाम पार्टियां या भाजपा हों.

1 min read
Sarita
January First 2021

लव जिहाद पौराणिकवाद थोपने की साजिश

पौराणिकवादी विचारधारा का पोषक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू लड़कियों को आजाद नहीं छोड़ना चाहता. वह उन्हें अपनी पसंद का जीवन जीने या जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं देना चाहता. मनुवादी व्यवस्था का समर्थक संघ पितृसत्ता को प्रभावशाली बनाना चाहता है ताकि ब्राह्मणों की दुकान चलती रहे. लव जिहाद का नाम ले कर बनाए गए धर्मांतरण कानून के जरिए हिंदू स्त्री को दहलीज के भीतर धकेले रखने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन यह 'सरकारी हिंदुत्व' लव जिहाद की आड़ में और भी बहुतकुछ करना चाहता है.

1 min read
Sarita
January First 2021

डाक्टरों के लिए मरीज का मनोविज्ञान जरूरी

मरीज शारीरिक रूप से ही नहीं, मानसिक रूप से भी बीमार होता है. डाक्टर और दवा के साथसाथ उसे मानसिक रूप से संतुष्ट कर दिया जाए तो उपचार के और बेहतर परिणाम सामने आएंगे.

1 min read
Sarita
January First 2021

नया साल कुछ नया करें

नया साल आता है और एक बार फिर मन करता है कुछ नया करने का. वैसे भी आने वाला साल पिछले सालों से कुछ अलग होगा. सुखदुख को अपने में समेटे आइए आगे बढ़ कर नए साल के लिए कुछ नया सोचें और नया करें.

1 min read
Sarita
January First 2021

नया साल नया फोन

नए साल की शुरुआत करें एक नए फोन के साथ. लेकिन अपने बजट का भी रखें पूरा ध्यान. यहां आप को स्मार्टफोन की दुनिया के सब से बेहतर फीचर्स के साथ बेहतरीन फोन की जानकारी प्राप्त होगी.

1 min read
Sarita
January First 2021

औनलाइन फास्टिंग

वर्क फ्रोम होम यानी तकरीबन पूरा काम औनलाइन. जो भी नैट के जरिए ड्यूटी कर रहे हैं उन की ड्यूटी का समय तय नहीं है. वे 24x7 ड्यूटी पर रहते हैं. ऐसे में वे तमाम प्रोब्लम्स के शिकार हो रहे हैं. सो, उन्हें चाहिए कि वे औनलाइन फास्टिंग करें.

1 min read
Sarita
January First 2021

किसान आंदोलन उलट आरोपों से बदनाम कर राज की तरकीब

सरकार ने अपने पुराने हथियार को निकाल कर किसान आंदोलन में माओवादियों, देशद्रोहियों के शामिल होने का हल्ला मचाना शुरू किया तो कितने ही हिंदी, अंगरेजी चैनलों व अखबारों ने इस हल्ले को सरकार की फेंकी हड्डी समझ कर लपकने में देर न लगाई रातदिन एक कर दिए.

1 min read
Sarita
January First 2021

हवेली चाहे जाए मुजरा होगा ही

निजीकरण के फायदे वही गिना रहे हैं जिन की जेब में मोटा पैसा है. इन में से 90 फीसदी वे ऊंची जातियों के अंधभक्त हैं जो सरकार के लच्छेदार जुमलों के झांसे में आ जाते हैं. इन में से कई लोग शौक तो सरकारी नौकरी का पालते हैं लेकिन सरकारी कंपनियां बिक जाएं, तो उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता. ऐसे में युवाओं को सोचना है कि बिन सरकारी कंपनी के सरकारी नौकरी कैसे संभव है.

1 min read
Sarita
January First 2021

लक्ष्मी पूजन फिर भी जेब खाली की खाली

कोरोना के नाम पर पूरे देश में केंद्र सरकार द्वारा असफल तालाबंदी लागू की गई. परिणाम इतना भयावह है कि तालाबंदी थोपे जाने के 8 माह बाद भी देश किसी भी स्तर पर संभल नहीं पाया है. मजबूरीवश देशवासियों ने इस साल तमाम त्योहारों पर हाथ भींच लिए और अब दीवाली, शादियों की धूमधाम भी तालाबंदी की भेंट चढ़ रही है.

1 min read
Sarita
December First 2020