क्यों प्रेम का बदला नफरत से देते शोएब-अफरीदी
Gambhir Samachar|August 16, 2020
सचिन तेंदुलकर, रोजर फेडरर, मोहम्मद अली या पेले जैसे खिलाडियों को विश्व नागरिक माना जाता है. ये भले ही भारत, ब्राजील, अमेरिका वगैरह के नागरिक हों पर इनके फैंस तो सारी दुनियाभर में हैं.
आर.के. सिन्हा

ये सभी सेलिब्रिटी खिलाड़ी एक तरह से विश्व नागरिक की भूमिका में आ चुके हैं. पर कुछ खिलाड़ी एक मुकाम हासिल करने के बाद भी अपनी टुच्ची तथा ओछी हरकतों और बयानबाजी से यह सिद्ध कर देते हैं कि वे कितने छोटे और घटिया किस्म के इंसान हैं. अब पाकिस्तान के गुजरे दौर के तेज गेंदबाज शोएब अख्तर को ही ले लें. वे कह रहे हैं कि जब साल 1999 में कारगिल युद्ध हुआ था, उस वक्त वे भी पाकिस्तान की तरफ से रणभूमि में जाने तक के लिए तैयार थे. बड़बोले शोएब अख्तर अब दावा कर रहे हैं कि उन्होंने 1999 में हुए कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने के लिए ही इंग्लिश काउंटी नॉटिंघम शायर से मिले 1,75,000 ब्रिटिश पाउंड के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. कारगिल युद्ध 16,000 फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था जिसमें 1,042 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे.

सवाल यह है कि क्या उन्होंने कभी अपने देश के हुक्मरानों से पूछा भी था कि उन्होंने भारतीय सीमा में अतिक्रमण करने की हिमाकत क्यों की? पाकिस्तान में बहुत से लेखकों-पत्रकारों वगैरह ने भी अपने देश के उस समय के आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ को लताड़ा था कि उनके दुस्साहस के कारण ही पाकिस्तान को युद्ध में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था.

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लगभग एक शताब्दी बाद दुनिया यह देखने के लिए बाध्य हुई कि एक महामारी ने पूरी धरती को एक साथ अपनी चपेट में ले लिया. तमाम आधुनिक मेडिकल साइंस इस महामारी को नियंत्रित करने में विफल साबित हुआ.

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मुंबई का ऑक्सीजन मैन

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