अमरनाथ गुफा- जहां लगता है शिव भक्तों का मेला
Sadhana Path|July 2021
अमरनाथ गुफा भक्तों की आस्था का प्रतीक तो है ही साथ ही यहां बाबा बानी के दर्शन से भक्तों को एक प्रकार के आध्यात्मिक सुरव की प्राप्ति भी होती है। इतना ही नहीं यह बात भी सत्य है कि इस गुफा तक पहुंचने का सफर स्वयं में ही बहुत अद्भुत होता है। आईए इस सफर को थोड़ा और करीब से जानें इस लेख के माध्यम से।
डॉ. जवाहर धीर

संसार में जो कुछ है... जो कुछ था... और जो कुछ होना है, उन सब के संधिसूत्र शिव हैं। अतीत, वर्तमान और भविष्य उनकी ताल और लय पर बनते मिटते हैं। ऐसे सदाशिव जिन्हें बर्फानी बाबा, अमरनाथ, आशुतोष, अर्धनारीश्वर महादेव, नीलकंठ, मृत्यंजय आदि नामों से पुकारा जाता है, एक ओर उदार और कल्याणकारी हैं, वहीं उनका रौद्र रूप व प्रलयंकारी नटराज का भी स्वरूप है। उनके इस नटराज स्वरूप में देश की सीमाओं की रक्षा का ही भाव निहित है। लोक मंगल के लिए तांडव करना और देवताओं को मृत्यु के भय से मुक्त करने के लिए द्रवीभूत होकर पुनः हिमलिंग के रूप में अमरनाथ गुफा में स्थित होना, इन्हीं विशेषताओं के कारण शिव भारतवर्ष के राष्ट्रव्यापी देव कहलाए।

अमरनाथ की गुफा, हमारे राष्ट्र की संस्कृति, एकता एवं अखंडता का प्रतीक है। यहीं पर भगवान शंकर ने माता पार्वती को अमरकथा सुनाई थी। युगों पूर्व की अमरनाथ कथा सुनाने की गाथा की किंवदंतियों से जुड़ी यह यात्रा इतनी अधिक रोमांचक है कि यहां आने वाला हर प्राणी प्रकृति के इस करिश्मे को देख कर दंग रह जाता है।

यात्रा का प्रथम पड़ाव पहलगांव

देवदार के ऊंचे पेड़ों के साथ-साथ लिद्दर नदी की कल-कल करती आवाज धरती का स्वर्ग कहे जाते कश्मीर में, अमरनाथ यात्रा के प्रवेश द्वार पहलगांव में यात्रियों का अभिनन्दन करती प्रतीत होती है। पहलगांव में प्रवेश का दृश्य इतना सुंदर है कि वहां पहुंच कर यूं प्रतीत होता है मानो यहीं जन्नत है।

कहते हैं कि जब भगवान शिव माता पार्वती को अमरकथा सुनाने के लिए चले तो सबसे पहले उन्होंने यहां अपनी सवारी नंदी बैल को छोड़ा था। पहलगांव को पहले बैलगांव कहा जाता था, जो बाद में धीरेधीरे पहलगावं कहलाने लगा। समुद्रतल से 7200 फीट की ऊंचाई पर बसा यह सुरम्य नगर चारों ओर गगनचुंबी पर्वतमालाओं से घिरा है और इन पर्वतमालाओं पर जमी हुई दूधिया बर्फ मानव हृदय में रोमांच भर देती है।

चन्दनवाड़ी

समुद्रतल से 95 सौ फीट की ऊंचाई और पहाड़ी नदियों के संगम की घाटी को चन्दनवाड़ी कहते हैं। पहलगांव से 16 किमी. दूर स्थित इस तल से यात्रा पर जाने वाले शिव भक्तों के लिए पैदल मार्ग प्रारंभ होता है। यहां तक यात्री सरकारी या निजी वाहनों में आते हैं और आगे की पर्वतीय यात्रा पैदल या घोड़ों पर करते हैं। चन्दनवाड़ी के बारे में कहा जाता है कि अमरनाथ गुफा को जाते समय भोलेनाथ ने अपने मस्तक का चंदन उतार कर छोड़ा था। पर्वतों से आती जलधारा यहां आकर छोटी नदी का रूप धारण कर लेती है, जिसे पार कर आगे बढ़ना होता है, मगर कुदरत ने यहां पर जो करिश्मा दिखाया है, उसे नंगी आंखों से देख कर हर कोई दंग रह जाता है। इस नदी को पार करने के लिए प्रकृति ने लगभग सौ फीट लंबा बर्फ का पुल बना रखा है, जिसे पार करके आगे बढ़ा जाता है।

पिस्सू घाटी

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