शुक्र ग्रह और ज्योतिष
Sadhana Path|May 2021
शुक्र के निकट जाने वाला पहला अंतरिक्ष यान मैरीनर 2 था, जिसने 1962 में यात्रा की। अभी तक लगभग 20 यानों का उपयोग शुक्र के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जा चुका है। रूसी यान 'वेनेरा' सबसे पहले शुक्र पर उतरा। हाल ही में अमेरिकी यान 'मैगेलन' ने रडार द्वारा शुक्र की सतह के विस्तृत चित्र उपलब्ध कराये हैं। शुक्र पर संभवतः किसी समय, पृथ्वी की तरह, अपार जल मौजूद था। मगर यह वाष्पन द्वारा समाप्त हो गया। अब शुक्र की सतह पूर्णतः शुष्क है।
डॉ. विन्द गोयल

शुक्र काम चेष्टा, सौंदर्य, प्रजनन शक्ति ललित कलाओं का स्वामी है। यह सफाई पसंद, सुरुचि वाला, विनयी, मिलनसार, उदार हृदय, यशस्वी बनाता है एवं कला कौशल, नाटक, अभिनय, चित्रकला में रुचि देता है। यह सूर्य के साथ हो, तो जातक कलाकार, चित्रकार, नेत्र रोगी, विलासी, कामुक, अविचारी होता है। चंद्रमा के साथ यह बलवान् होता है। जातक व्यापारी, धनवान, सुखी एवं भोगी होता है। यह मंगल के साथ हो, तो व्यापारकुशल, धातुओं का कार्य करने वाला, योगी, कार्यपरायण, तेज वाहन चलाने वाला, गतिशील, अनेक स्त्रियों का उपभोग करने वाला होता है। बुध के साथ यह विद्या, बुद्धिमत्ता, साहस आदि देता है। जातक मुंशी, लेखक, सुखी, विलासी, राजमान्य, राज्याधिकारी, शासक होता है और गुरु के साथ सुखी, बलवान् तथा विद्वान् बनाता है। शुक्र-शनि का योग निम्न मनोवृत्ति का सूचक है, जो पाखंडी, दंभी, स्वार्थी बनाता है।

शुक्र ग्रहों में पृथ्वी के सबसे निकट है। सूर्य से दूरी में शुक्र दूसरे स्थान पर है (बुध निकटस्थ है) शुक्र प्रेम का ग्रह है। यह सौंदर्य, प्रेम, यौनाकर्षण और मनुष्य के अंतर्मन की वास्तविकता का प्रतीक है। शुक्र मंगल के बाद दूसरा ग्रह है, जो सबसे कम वक्री गति में आता है। पृथ्वी से देखने पर वक्री गति में ग्रह उल्टा चलता प्रतीत होता है। ऐसा उस समय होता है, जब वक्री ग्रह और पृथ्वी सूर्य के एक ओर आ जाते हैं। ऐसे में शुक्र का भ्रमण (पश्चिम से पूर्व) वक्री हो जाएगा, क्योंकि पृथ्वी तथा अधिसंख्य ग्रह पूर्व से पश्चिम में भ्रमण करते हैं। हालांकि शुक्र विपरीत दिशा में भ्रमण करता है, इसलिए वहां पर सूर्य पश्चिम में उगता है।

शुक्र के वातावरण में 96 प्रतिशत कार्बन डाईऑक्साइड मौजूद है। इस वजह से शुक्र का तापमान 4000 से से भी अधिक है। अन्य गैसों में 3 प्रतिशत नाइट्रोजन, 0.003 प्रतिशत वाष्प तथा बाकी अन्य गैसों की अल्प मात्राएं इसमें हैं। वातावरण की ऊंचाई सतह से 30 कि.मी. है। बादल गंधक अम्ल (सल्फ्यूरिक एसिड) से परिपूर्ण हैं। बहुत से खोजी यान शुक्र की सतह पर उतरे, पर असफल रहे। 1975 में सर्वप्रथम वहां की पथरीली सतह का चित्र प्राप्त हुआ और वहां के तापमान की जानकारी मिली।

शुक्र पर बादलों की उपस्थिति और वहां की जलवायु के कारण मानचित्रण के लिए राडार का उपयोग किया जाता है। शुक्र की सतह मुख्यतः एक विशाल मैदान है। कुछ ऊंचे और नीचे इलाके भी हैं। ऊंचे क्षेत्र कुल क्षेत्रफल के लगभग 27 प्रतिशत है, जबकि निचले क्षेत्र 8 प्रतिशत हैं। शुक्र पर सबसे उंचाई पर मैक्सवेल पर्वत है। शुक्र पर एक विशाल ज्वालामुखी 'सपस मोंस स्थित है, जो 400 कि. मी.चौड़ा और लगभग 1.6 कि. मी. ऊंचा है। शुक्र दूरस्थ ग्रहों पर जाने वाले अंतरिक्ष यानों के लिए सुविधाजनक पड़ाव है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि ग्रह अपने गुरुत्व बल से अंतरिक्ष यान को ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम होते हैं।

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