अम्ल, क्षार और pH आयनीकरण से लेकर बफर घोल तक
Shaikshanik Sandarbh|March - April 2021
विज्ञान में पढ़ाई जाने वाली कई 'अवधारणाओं के समान उत्तरोत्तर विकास का विचार अम्ल और क्षार की अवधारणा पर भी लागू होता है। इसका मतलब है कि हम एक ही अवधारणा से बार-बार विभिन्न स्तरों पर मुलाकात करते हैं और अपनी समझ को तराशते जाते हैं। स्कूलों में इस विषय को बहुत ही चलताऊ ढंग से पढ़ाया जाता है, उससे सम्बन्धित अवधारणाओं को गहराई से टटोलने की कोशिश करता है यह आलेख। उम्मीद है कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कैसे आयनीकरण pH का निर्धारण करता है और किसी भी जलीय घोल की pH से तय होता है कि वह अम्ल की तरह बर्ताव करेगा या क्षार की तरह।
उमा सुधीर

मिडिल स्कूल में जब हमारा पहला परिचय अम्ल और क्षार से करवाया गया था, तब हमें यह भी बताया गया था कि धातुओं के ऑक्साइड पानी में घुलकर क्षारीय घोल बनाते हैं जबकि अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय घोल बनाते हैं। और हमने लिटमस कागज़ की मदद से अम्ल और क्षार की पहचान करना सीखा था। इस शुरुआती परिभाषा को तराशने की ज़रूरत होती है और अगली कक्षाओं में हम यही करते हैं।

स्वांते अर्लीनियस (1859 1927): अम्ल और क्षार को गुणों के आधार पर परिभाषित करने की कोशिश लीवोज़ियर के समय से चल रही थी। अर्हीनियस ने अम्ल-क्षार को ऐसे पदार्थों के रूप में पहचानने की कोशिश की जो पानी में घोलने पर हायड्रोजन आयन और हायड्रॉक्साइड आयन उत्पन्न करते हैं। एक हिसाब से अब स्वाद-गन्ध जैसे स्थूल गुणों से आगे बढ़कर सूक्ष्म गुणों की ओर सफर शुरू हो गया था।

परिभाषा का दायरा बढ़ाते मॉडल

जब यह विषय हाई स्कूल में फिर से प्रकट होता है, तो हम सीखते हैं कि अर्हीनियस ने अम्लों को ऐसे पदार्थों के रूप में परिभाषित किया था जो घोल में H+ आयन उत्पन्न करते हैं (जैसे पानी में घोले जाने पर हायड्रोक्लोरिक अम्ल)। इसके विपरीत क्षार घोल में OH-आयन उत्पन्न करते हैं (जैसे पानी में कॉस्टिक सोडा)। इसके बाद हमारा परिचय अम्ल और क्षार को लेकर ब्रॉन्स्टेड और लॉरी के विचारों से करवाया जाता है। हमें पता चलता है कि अम्ल और क्षार, दोनों को H+ आयन के लिहाज़ से परिभाषित किया जा सकता है अम्ल वे पदार्थ हैं जो H+ आयन देते हैं जबकि क्षार उन्हें ग्रहण करते हैं। (इस परिभाषा के मुताबिक हायड्रोक्लोरिक अम्ल तो अम्ल ही रहता है लेकिन अब आप अमोनिया को भी एक क्षार के रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं क्योंकि यह H+ ग्रहण करके अमोनियम आयन (NH,') बना देती है।

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