खुशियों की बारिश
Champak - Hindi|September Second 2021
"जेहरा बेटा, मैं खरीदारी करने बाजार जा रही मैं हूं. कुछ देर में वापस आ जाऊंगी. तब तक तुम कमरे के अंदर बैठ कर पढ़ाई करो और हां, बारिश आए तो भीगना मत,” मां की बात सुन कर 10 साल का साहिल कमरे के अंदर जा कर पढ़ाई करने लगा.
इंद्रजीत कौशिक

थोड़ी देर बाद ही अचानक तेज बारिश शुरू हो गई. कुछ ही देर में लाइट भी चली गई तो जेहरा को कमरे की खिड़की खोलनी पड़ी.

उस ने खिड़की से झांक कर देखा कि कालौनी के बच्चे बारिश के पानी में खूब मस्ती कर रहे थे.

"तुम भी आओ न जेहरा, बारिश के पानी में भीगने का मजा ही कुछ और है,” मोहन ने खिड़की से झांक रही जेहरा को बाहर आने का इशारा किया.

“नहीं दोस्त, मैं नहीं आ सकती. मेरी मां कहती हैं कि बारिश में नहाने से ठंड लग जाती है. उन्होंने मुझे पानी में भीगते हुए देख लिया तो मुझे डांट पड़ जाएगी," जेहरा ने कहा.

हालांकि उस का मन भी कर रहा था कि वह अपने दोस्तों के साथ बारिश के पानी में खूब मस्ती करे.

"देखो न, हम सभी यहां नहा रहे हैं. हमें तो नहीं लगी सर्दी, हम तो हर बारिश में ऐसा ही करते हैं, मोहन ने कहा, "एक बार नहा कर तो देखो, खूब मजा आएगा.

जैसे ही बारिश और तेज हुई खिड़की से कमरे में पानी आने लगा तो जेहरा को खिड़की बंद करनी पड़ी. बच्चों को बारिश में मस्ती करते देख कर उसे बहुत अच्छा लग रहा था.

'इतनी बारिश में मां कहीं रुक गई होंगी, क्यों न मैं उन के लौटने से पहले छत पर जा कर बच्चों की मस्ती देखू,' यह सोच कर जेहरा अपने कमरे से निकली और सीढ़ियों के रास्ते दौड़ती हुई छत पर जा पहुंची.

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