एक क्षण की कीमत
Champak - Hindi|September First 2021
27 जून, 1964 को केरल के कोझिकोड जिले के पय्योली गांव में एक बच्ची ने जन्म लिया. उस का नाम ऊषा रखा गया. ऊषा के पिता का नाम ई.पी.एम. पैथल तथा माता का नाम टी.वी. लक्ष्मी था. उस के जन्म के समय घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. उस के पिता की कपड़ों की एक छोटी सी दुकान थी और 6 बच्चे थे, इसलिए उन्हें परिवार 6 के भरणपोषण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. इस की वजह से ऊषा कुपोषण का शिकार हो गई और बीमार रहने लगी.
कुसुम अग्रवाल

लेकिन जैसेजैसे ऊषा जवान होती गई, उस का स्वास्थ्य सुधरने लगा. इस के साथसाथ वह काफी सक्रिय भी हो गई. सारे दिन इधरउधर घूमना, दौड़ना, ऊंची दीवारों पर चढ़ना ही उस का पसंदीदा शौक था. उस के इस शौक में उस की लंबीलंबी टांगों ने भी बहुत मदद की.

ऊषा की मां कहतीं, “अरे, थोड़ी देर बैठ भी जाया कर," लेकिन उसे एक जगह टिक कर बैठना बिलकुल भी पसंद नहीं था. हां, इस बात का मां को फायदा भी था, क्योंकि ऊषा उन के बाहर के सब काम पलक झपकते ही कर देती थी. चाहे बाजार से कुछ सामान लाना हो या फिर पिताजी की दुकान तक पैदल जाना हो, वह इतना तेज चलती थी कि इन सब कामों में आम बच्चों से आधा से भी कम समय लेती थी.

गरीब होने के बावजूद ऊषा के मातापिता उसे स्कूल भेजने लगे. जब वह चौथी कक्षा में थी, तो एक दिन उस के टीचर ने उसे 7वीं क्लास की चैपियन के साथ दौड़ लगाने को कहा. ऊषा छोटी थी जबकि वह लड़की बड़ी और चैंपियन थी. लेकिन फिर भी ऊषा उस के साथ दौड़ी और उस से आगे निकल कर उस ने रेस जीत ली.

उसी दिन से ऊषा की एथलेटिक्स में रुचि बढ़ गई और उस ने खेलकूद में अधिक उत्साह से भाग लेना शुरू किया.

एक दिन स्कूल से घर वापस आने के बाद ऊषा ने अपनी मां को बताया, “मां, हमारी स्कूल में बहुत से कार्यक्रम हो रहे हैं जिन में दौड़ प्रतियोगिता भी है."

उस समय ऊषा के मामाजी भी वहां उन से मिलने आए हुए थे. यह बात सुन कर वे बोले, "फिर तो तुझे इस दौड़ प्रतियोगिता में अवश्य हिस्सा लेना चाहिए. सारे दिन दौड़तीफिरती है. इसलिए अपने इस टैलेंट का इस्तेमाल करो."

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