मीशा की शरारत
Champak - Hindi|August First 2021
सैली गिलहरी जमीन पर रेंग कर अपना भोजन ढूंढ़ रही थी. मां के मना करने पर भी वह भरी दोपहरी में अकेले पेड़ के नीचे भोजन ढूंढ़ने आई थी. उस की मां ने पहले भी समझाने की कोशिश की थी, "बेटी, दोपहर के समय जंगल में बहुत खतरा रहता है. तुम्हें अकेले बाहर नहीं जाना चाहिए."
डा. के. रानी

लेकिन सैली मां की बात जरा भी न सुनती और जब भी मौका मिलता, अकेले ही भोजन की तलाश में जंगल की तरफ निकल पड़ती. सैली जिधर भोजन की तलाश में जाती थी, उस तरफ फलों के कई पेड़ थे, जिन पर फल पके हुए थे. सैली ने देखा अमरूद के बड़े से पेड़ पर मीशा बंदर बैठा हुआ था. वह पेड़ की डाल हिला रहा था. जैसे ही उस से 2-3 अमरूद नीचे गिरे उस ने डाल हिलानी छोड़ी और नीचे आ गया. मीशा ने नीचे से अमरूद उठाए और उन्हें आराम से खाने लगा. सैली को यह देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ, उसे समझ नहीं आ रहा था कि मीशा ने फल तोड़ कर पहले नीचे क्यों गिराए? वह चाहता तो पेड़ पर बैठ कर भी आराम से पके अमरूद खा सकता था. सैली बड़ी देर तक यही सोचती रही.

मीशा ने बड़े प्यार से अमरूद खाए और उन्हें जरा भी बरबाद नहीं किया. पेट भर जाने के बाद वह वहां से चला गया. कुछ देर बाद सैली भी अपने घर चली गई.

दूसरे दिन फिर मीशा वहां पहुंचा. कल की तरह उस ने आज भी फिर अमरूद की डाल हिलाई. पेड़ से दो पके हुए अमरूद नीचे गिरे. मीशा डाल से उतरा और उस ने नीचे से उठा कर अमरूद खाए तथा जाने लगा. उसे रोज ऐसा करते देख सैली से न रहा गया ने पूछा, "हैलो, बंदर भाई, इस से पहले मैं ने तुम्हें कभी यहां नहीं देखा."

“मैं तो यहीं रहता हूं इस वन में.''

"तुम से कभी पहले मुलाकात नहीं हुई. मुझे तुम से एक बात पूछनी थी.'

"जरूर पूछो,” उस ने कहा.

"सारे बंदर पेड़ से अमरूद तोड़ कर वहीं बैठ कर खाते हैं. एक तुम हो जो पहले डाल हिला कर फल नीचे गिराते हो और फिर जमीन से उठा कर खाते हो."

"तो तुम मेरी जासूसी जासूसी कर रही थी?"

"ऐसा ही समझ लो. मुझे आश्चर्य हुआ तो मैं ने आप से पूछ लिया."

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