Facebook Pixel वृक्षों पर होता है अलौकिक शक्तियों का निवास | Jyotish Sagar - religious-spiritual - Lees dit verhaal op Magzter.com
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वृक्षों पर होता है अलौकिक शक्तियों का निवास

Jyotish Sagar

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September 2023

एक धार्मिक विधि सम्पन्न हो रही थी। वृद्धा ने आशीर्वाद दिया 'घर में लक्ष्मी का निवास हो, वंश को केले के पेड़ के अनुसार फूल दो, दूर्वांकर के समान वंश विस्तार हो, वट-वृक्ष एवं पीपल के समान तपस्वी बनकर सबको छाया का सुख दो।'

- ज्योतिप्रकाश खरे

वृक्षों पर होता है अलौकिक शक्तियों का निवास

सारा वृक्ष-परिवार एवं मानव समाज को जोड़ने का यह प्रयत्न वृक्षवल्ली वंशवृद्धि के प्रतीक है। वृक्ष हमारे गुरु हैं, साथी हैं। भारतीय संस्कृति में परम्परानुसार यह माना जाता है कि वृक्षों पर अद्भुत एवं अलौकिक शक्ति का निवास है। इसलिए वृक्षों को पूजनीय माना जाता है। इसके अलावा अनेक वृक्षों के पत्ते, छाल, फूल, जड़ों आदि का औषधियों में उपयोग होता है। इन वृक्षों के प्रति हम कृतज्ञ हैं। अनेक सत्पुरुषों का सान्निध्य वृक्षों को मिला है। उनके सामने हम नतमस्तक हैं जैसे बोधिवृक्ष, गुलेर का वृक्ष आदि। 

भारतीय संस्कृति प्रकृति के साथ ही विकसित हुई हैं। सीमेन्ट-कंक्रीट के जंगल मनुष्य ने ही विकसित किए हैं। पैसे के दासों ने प्रदूषण का खतरा पैदा किया है। भारतीय महिलाएँ वृक्ष पूजा करके पर्यावरण को सँवारती हैं। वे परोपकारी, निष्पक्ष वृक्षों का सम्मान करती है। पूरा 'आयुर्वेद' तो वे जानती भी नहीं हैं, फिर भी महिलाएँ भक्ति भाव से परम्पराओं को निभाती हैं। परमपिता ब्रह्मा का निवास स्थान पतिव्रता सावित्री ने वृक्ष के नीचे बैठकर अपने पति सत्यवान् की यमदत से प्रार्थना कर जीवित किया।

वटवृक्ष

हिन्दू धर्म में स्त्रियाँ वटसावित्री का व्रत करती हैं। प्रयाग में श्रीराम एवं सीताजी ने इसी वृक्ष के नीचे आश्रय लिया था। जटाएँ धारण करता यह वृक्ष वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मध्यप्रदेश के चिचोली ग्राम में वटवृक्ष के नीचे 5,000 लोग छाया में बैठ सकते हैं। चिंरजीविता का यह प्रतीक है।

आम का वृक्ष

दूसरा पेड़ है आम्रवृक्ष अर्थात् आम का पेड़ । मंगल प्रसंग, धार्मिक विधि एवं शुभ कार्यों में इस वृक्ष को चैतन्य का प्रतीक माना जाता है। यह वृक्ष बहुत महत्त्व रखता है। घर-घर में इसके पत्ते से तोरणद्वार सजाते हैं। शिव, चन्द्रमा और मदन को आम का बयार आम्रमंजरी अत्यन्त प्रिय है एवं माघ सुदी द्वितीया को ये देवी को अर्पित की जाती है। दीर्घजीवी यह वृक्ष छायादार तो है ही, साथ ही यह वृक्ष फलों का राजा भी है।

भगवान महावीर ने आमराई में तपश्चर्या की है। विंध्यक्षेत्र में लोग आम्रवृक्ष की शादी चमेली की बेल से करते हैं। जब तक यह शादी नहीं होती, तब तक वे इस वृक्ष के फल नहीं खाते।

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