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उदारता की आभा

Jansatta Lucknow

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July 06, 2025

म इस उम्मीद में अपनी सुबह की शुरुआत करते हैं कि अपने सुखदुख हम जिससे साझा करें, वह उसे हमारी नजर से देखे और उसके आशय को लेकर वह अपनी किसी राय के बजाय हमारे प्रति उदार रुख अपनाए।

यह सामने वाले के भीतर अपनी स्वीकार्यता है, तो उसके भीतर इस कद्र के प्रति एक स्वाभाविक कृतज्ञता बेहतर मनुष्य होने का रूपक है। जीवन-दृष्टि के लिहाज से देखें तो उदारता एक ऐसा सुंदर जीवन-मूल्य है, जो मनुष्य के भीतर न सिर्फ दूसरों के प्रति दयालुता और करुणा दिखाने का एक गुण है, बल्कि यह व्यक्तिगत विकास और खुशी को भी बढ़ाने का एक बेहतर जरिया है। बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करना और उनके साथ अपने सुख-दुख साझा करना अगर व्यक्ति के आचार-व्यवहार और विचार में शामिल है, तो इसे उदारता के अर्थ के रूप में देखा जा सकता है। बल्कि बिना किसी अपेक्षा के सहायता और सहयोग मनुष्य को ज्यादा मानवीय बनने में जितनी बड़ी भूमिका निभाता है, उतना कुछ अन्य नहीं।

मनुष्यता की कसौटी

कई बार होता यह है कि छोटे-छोटे आग्रहों, पूर्वाग्रहों या फिर दुराग्रहों की वजह से लोग वैसे अवसरों को भी खो देते हैं, जो मनुष्यता की कसौटी पर उन्हें बेहतर मनुष्य बना सकते हैं। सवाल है कि कौन ऐसा होगा, जो खुद को बेहतर मनुष्य के रूप में नहीं देखना चाहेगा, भले उसे सामाजिक रूप से इस कसौटी पर थोड़ा कम करके देखा जाता हो। मगर आखिर क्यों ऐसा होता है कि इसके बावजूद लोगों के भीतर उदारता के मूल्य अपने मूल रूप में बच नहीं पाते और उनकी सोच की प्रक्रिया पर संकीर्णता हावी होती जाती है?

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