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मातृत्व की राह क्यों हुई मुश्किल
Dainik Jagran
|July 05, 2025
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पुरानी गाड़ियों पर रोक की चर्चा है। बढ़ता प्रदूषण, अनियमित जीवनशैली व आफिस का तनाव सेहत पर असर डालने के साथ ही मां बनने की राह को भी मुश्किल बना रहा है। क्या है समाधान? विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर बता रही हैं सीमा झा
संतान कब होगी, क्यों नहीं हुई अब तक ? ऐसे चुभने वाले सवाल अब कम हो गए हैं। मां न बन पाने का दर्द जो कभी अपराधबोध बन गया था, वह अब मन से निकलने लगा है। पहले वह हर तीसरे दिन फर्टिलिटी क्लीनिक्स के चक्कर लगाया करतीं थीं, पर अब ऐसा नहीं। पर शादी के आठ साल बीत जाने के बाद आज भी संतान न होने का दर्द मन से नहीं जाता। लक्ष्मी (बदला नाम) इससे मुक्ति चाहती हैं, इसलिए इन दिनों पेंटिंग सीख रही हैं। शौक में स्वयं को व्यस्त करके उन्होंने इस दर्द व तनाव से मुक्त रहने का रास्ता तलाश लिया है। यह कहानी उन सभी को अपनी लग सकती हैं, जिनका संघर्ष उनके जैसा है।
आधुनिक जीवनशैली की देन
संतान होना प्रकृति का उपहार है, जिसके लिए आज कठिन तप करना पड़ रहा है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज, नई दिल्ली की वरिष्ठ प्रसूति व स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. मंजू पुरी के अनुसार, लड़कियां कार्पोरेट जिंदगी के जाल में इस तरह फंसी हैं कि स्वयं के लिए समय नहीं निकाल पातीं। शादी के बाद संतान की प्लानिंग एक बड़ा प्रोजेक्ट बन जाता है। कामकाज के दबाव में स्वस्थ खानपान से दूरी, नींद से समझौता, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव हावी है। इस कारण वे मां बनने की उम्र में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की शिकार हो रही हैं। इससे इनफर्टिलिटी की चुनौती भी पैदा हो रही है। आमतौर पर कोई महिला 35 साल की उम्र तक यदि निरंतर 12 माह तक प्रयासों के बाद भी गर्भधारण में असफल रहती हैं तो इसे इनफर्टिलिटी माना जाता है। छोटी उम्र से लड़कियों को प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर सजग रहने की सीख देनी होगी। स्वास्थ्यकर जीवनशैली पर जोर होना चाहिए।
भावनात्मक सेहत जरूरी
Dit verhaal komt uit de July 05, 2025-editie van Dainik Jagran.
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