Poging GOUD - Vrij

सिलबट्टा नहीं सिलबट्टी मानसिकता की शिकार महिलाएं

Sarita

|

April First 2025

महिलाएं थकान की शिकार हो रही हैं, बीमारियों से घिर रही हैं लेकिन उफ भी नहीं कर रहीं, समानता की मांग नहीं कर रहीं. वे यह भी नहीं पूछ पा रहीं कि उन के कमाए पैसों पर उन का पूरा हक क्यों नहीं.

- भारत भूषण श्रीवास्तव

सिलबट्टा नहीं सिलबट्टी मानसिकता की शिकार महिलाएं

पिछले दिनों ओटीटी पर रिलीज हुई हिंदी फिल्म 'मिसेज' मलयालम फिल्म 'द ग्रेट इंडियन किचन' की रीमेक है. इस फिल्म को मीडिया ने उतना भाव दिया नहीं जिस की वह हकदार थी. कोई नहीं चाहता खासतौर से मनुवादी मीडिया तो रत्तीभर भी नहीं कि समाज के पौराणिक सचों को उजागर करते साहित्य और फिल्मों पर बात की जाए. भक्त मीडिया दलित, शूद्रों की बात करते डरता है. वह स्त्री विमर्श से भी डरता है क्योंकि ये और ऐसे विषय धर्म की रूढ़ियों की और पितृसत्ता की पोल खोलते हैं.

'मिसेज' इस का अपवाद नहीं है. कैसे और क्यों इस की भरसक अनदेखी की गई, यह जानने से पहले इस की विषयवस्तु थोड़े में ही समझें तो लगता है कि निर्देशक आरती कदव ने रियल लाइफ को रील में ज्यों का त्यों उतार दिया है. कुछ अतिशयोक्तियों के साथ ही सही लेकिन यह केवल पेशे से डांसर ऋचा की ही नहीं, बल्कि लगभग हरेक औरत की कहानी है.

ऋचा जब शादी कर पति के घर आती है तो उसे एहसास होता है कि यह परिवार बेहद परंपरावादी है, जिस में घर के पुरुष खाट तोड़ते रहते हैं और महिलाएं घरेलू कामकाज में गुलामों की तरह खटती रहती हैं. यानी, परिवार पूरी तरह पितृसत्तात्मक है. वह नौकरी करना चाहती है लेकिन ससुर इस की इजाजत नहीं देता क्योंकि इस से मुफ्त की नौकरानी हाथ से निकल जाती और बहू कमाऊ हो तो शोषण के खिलाफ विद्रोह भी कर सकती है.

एक दृश्य में बड़ी सहजता से दिखाया गया है कि सास कुरसी तोड़ते ससुर के टूथब्रश में पेस्ट लगा कर देती है. घर की औरतों को मर्दों से पहले खाने की इजाजत नहीं. मुद्दे की बात ससुर का इस बात पर ऋचा को कोसना या नसीहत देना है कि वह सिलबट्टे पर पिसी चटनी ही खाएगा, मिक्सी की नहीं. यहां हर कोई या कोई भी सासससुर का पक्ष लेते यह दलील देते फेमिनिज्म का विरोध कर सकता है कि अब तो सिलबट्टा रसोई से गायब है. इस्तेमाल मिक्स्चर ग्राइंडर का ही होता है. बात सही है लेकिन निर्देशक की मंशा दरअसल सिलबट्टी मानसिकता को उकेरने की है और वे इस में कामयाब भी रही हैं.

image

MEER VERHALEN VAN Sarita

Sarita

Sarita

कैरम

अपनों से जुड़ने का अनोखा खेल

time to read

3 mins

December First 2025

Sarita

Sarita

बैकबेंचर्स

जब से केरल में सर्कुलर जारी हुआ है कि क्लासरूम में अब कोई बैकबैंचर नहीं होगा तब से बैकबैंचर्स की नींद उड़ गई है. कैसे लेंगे वे पीछे बैठ कर मस्ती करने का सुख?

time to read

4 mins

December First 2025

Sarita

Sarita

आदिवासी

भीमा तो बस गांव में आदिवासियों की जीवनशैली देखने गया था, लेकिन फिर क्यों सीबीआई उस के पीछे हाथ धो कर पड़ गई थी? जब भीमा पुलिस के हत्थे चढ़ा तो अंत अकल्पनीय रहा.

time to read

10 mins

December First 2025

Sarita

Sarita

एबौर्शन

निशा आज उसी दोराहे पर खड़ी थी जिस पर कभी उस की मां खुद उद्विग्न सी छटपटा रही थी. मगर आज उचित मार्गदर्शन करने के बजाय वह निशा पर उबल पड़ी थी. आखिर क्यों?

time to read

7 mins

December First 2025

Sarita

Sarita

पौराणिक फिल्मों के पीछे अंधविश्वास या कुछ और

पौराणिक फिल्में हमेशा से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में बनती रहीं मगर उन का स्केल बहुत बड़ा नहीं होता था, अब उन का स्केल बड़े स्तर पर होने लगा है, आखिर क्या है इस की वजह, जानिए.

time to read

7 mins

December First 2025

Sarita

Sarita

औरतों के जिस्म पर मर्दों की मर्जी क्यों

शादी के बाद पति को अपनी पत्नी के साथ कुछ भी करने का अधिकार मिल जाता है.

time to read

6 mins

December First 2025

Sarita

Sarita

दान के धन पर सिर्फ ब्राह्मणों का हक ?

मंदिरों में दान आम लोग देते हैं, यदि उस का कुछ हिस्सा सरकार उन के ही विकास कार्यों में खर्च करती है तो गलत क्या है? हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का इस मामले में निर्देश ब्राह्मणों पर दान के पैसों पर पूरा अधिकार देने जैसा है.

time to read

11 mins

December First 2025

Sarita

Sarita

बिहार चुनाव सत्तावाद में डूब गया समाजवाद

बिहार में एनडीए गठबंधन भारी बहुत से जीत गया है.

time to read

11 mins

December First 2025

Sarita

Sarita

बड़ा मकान कितना नफानुकसान

बड़ा मकान हर किसी का सपना होता है जो अब, होम लोन के जरिए ही सही, साकार होने लगा है.

time to read

12 mins

December First 2025

Sarita

Sarita

असलीनकली का फंडा पोल्ट्री फार्म का अंडा

भारत में अंडे के आहार को ले कर जबतब बहस चलती रहती है. अंडा आखिर है क्या? खाने और न खाने वालों के अपने मत हैं. बावजूद इस के, अंडा आज भी अपनी जगह पर न सिर्फ कायम है बल्कि बड़ी मात्रा में खाया भी जाता है.

time to read

4 mins

December First 2025

Listen

Translate

Share

-
+

Change font size