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भक्ति की श्रेष्ठता का पर्व है हनुमान जयंती
Sadhana Path
|May 2025
हनुमान जयंती हालांकि भक्ति की महानता का त्योहार है। हनुमान भक्तों के आदर्श हैं। एक ऐसे भक्त जिन्होंने असुरता खत्म करने के लिए खुद को भगवान के कार्य में समग्र रूप से समर्पित कर दिया।
हनुमान एक ऐसे भक्त हैं, जो समर्पण से देवता हो गए। भक्ति शब्द संस्कृत व्याकरण के अनुसार भज् सेवायां धातु से निर्मित है। भक्त वह है जिसमें सेवा भावना भरी पड़ी हो। सेवा का महत्त्व बतलाते हुए संत तुलसीदास विनय पत्रिका में उल्लेख करते हैं-' सेवक भयो पवनपूत साहिब अनुहरत। ताको लिए नाम राम सबको सुढ़र ढरत ।।' अर्थात् हनुमान जी सेवा करते-करते राम के समान हो गए। राम उनके इतने परम प्रेमी हैं कि अब तो मात्र हनुमान का नाम भर लेने से ही वे खुश हो जाते हैं।
किंतु इस भक्ति की पराकाष्ठा को प्राप्त करने के लिए सद्गुणों का विकास करना होता है। संत तुलसीदास ने हनुमान जी की वंदना करते हुए लिखा है- 'अतुलित बल धामं हेमशैलाभ देहं। दनुज वन कृषानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम। सकल गुण निधानंष्वानराणामधीषं। रघुपति प्रिय भक्तं वातजातं नमामि।' अर्थात् अतुलित बल, असुरता केष्दांत तोड़ने में समर्थ, ज्ञानवान, विद्यावान और सारे सद्गुणों की खान तथा लोकनायक की विशेषताओं से वे लबालब थे। भक्त के गुणों के परिमार्जन पर बल देते हुए राष्ट्र संत श्रीराम शर्मा आचार्य ने इस प्रकार लिखा है-
Dit verhaal komt uit de May 2025-editie van Sadhana Path.
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