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कैसे और क्यों रखें उपवास?

Sadhana Path

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April 2025

भारतीय संस्कृति में व्रत, उपवास का विशेष महत्त्व है, किन्तु आज व्रत, उपवास के स्वरूप में काफी परिवर्तन आ गया है। लोग व्रतों के उदेश्यों व महत्त्व को भूल गए हैं। लेख से जानें व्रत की विधि व महत्त्व।

- डॉ. वीरेन्द्र अग्रवाल

कैसे और क्यों रखें उपवास?

उपवास शब्द हर धर्म, हर जाति के लिए जाना-पहचाना है। स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके जादुई प्रभाव ने इसे इक्कीसवीं सदी में भी उपयोगी बनाया हुआ है। न सिर्फ भारत में, बल्कि दुनिया भर में अलग-अलग रूपों और नामों के साथ व्रत-उपवास वगैरह का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन मजेदार बात यह लगती है कि लोग व्रत-उपवास का वास्तविक रूप भूल चुके हैं और आजकल उपवास रखने वाले लोग आम दिनों की अपेक्षा दोगुना खा लेते हैं। कुट्टू के आटे की पूरी-पकौड़ी, साबूदाने के पापड़, खीर, आलू के तरह-तरह के व्यंजन से भरी स्पेशल थालियां वाकई यह समझना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में उपवास है क्या और इसे रखने का उद्देश्य क्या है?

तन और मन की शुद्धता

दरअसल सभी धार्मिक बातों में कुछ न कुछ ऐसा तथ्य छिपा रहता है जिसका वैज्ञानिक आधार होता है और जो किसी न किसी रूप में मनुष्य जीवन के लिए फायदेमंद होता है। फायदेमंद बातें भी अनुशासन की वजह से लोग कम ही मानते हैं, अगर जब यही तथ्य 'धर्म' से जुड़कर सामने आता हैं तो किसी भी मनुष्य से इसका पालन कराना आसान हो जाता है। यही कारण है कि धर्म की परिभाषा में कहा जाता है कि 'धर्म वही, जिसे धारण किया जा सके।'

सभी धर्मों में अलग-अलग मान्यताओं, विश्वास और नामों के साथ उपवास का जो स्वरूप दिया गया है, वह वास्तव में यही है कि संयमित आहार से या निराहार रहने से शरीर को अपनी इंद्रियों को नियंत्रण करना आता है। उपवास सिर्फ वजन ही संतुलित नहीं रखता, यह काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसे भावों को भी नियंत्रित करता है। उपवास सही ढंग से रखने के दौरान शरीर के सभी विषाणु बाहर आ जाते हैं और शरीर अपनी उत्पादकता, आत्मबल और प्रतिरोधक क्षमता को नए सिरे से प्रभावी बनाता है। उपवास से पाचन तंत्र पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। इसीलिए उपवास को सच्चे अर्थों में समझने के लिए इस बात को गहराई से समझना जरूरी है कि उपवास रखने का अर्थ सिर्फ भूखा रहना या एक समय का भोजन कर लेना भर नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण पद्धति है और इसका सही लाभ तभी मिलेगा, जब इस पूरी पद्धति को पूरे समर्पण और सही ढंग के साथ अपनाया जाए। अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण उपवास बिमारियों में भी आश्चर्य प्रभाव दिखाता है।

सही कारण, सही निवारण

MEER VERHALEN VAN Sadhana Path

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ओशो शब्दों के सम्राट हैं

पहली बात तो ओशो एक विचारक हैं, महान विचारक। जो किसी धर्म से नहीं विचारों से जुड़ा रहा। विचारों से जुड़ने का मतलब है सत्य से जुड़ना। जो सत्य से जुड़ता है सब उसके दुश्मन हो जाते हैं, यही कारण था कि ओशो के इतने दुश्मन पैदा हुए। ओशो के साथ बस एक दिक्कत रही कि 99 प्रतिशत वह लोग उनके खिलाफ रहे जिन्होंने उन्हें न कभी सुना है, न ही कभी पढ़ा है।

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December 2025

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अद्भुत बौद्धिक क्षमता से युक्त व्यक्ति

मेरी दृष्टि में ओशो अपने समय के सबसे ज्यादा बौद्धिक क्षमता से युक्त व्यक्ति थे जिनमें ज्ञान और विज्ञान को अपने तर्कों के माध्यम से प्रस्तुत करने की अद्भुत क्षमता थी। आप उनसे सहमत हो या न हो वो अलग बात है। मेरी नजर में उन जैसा कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है।

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December 2025

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काल की शिला पर अमिट हस्ताक्षर हैं ओशो

जब हम किसी भी व्यक्तित्व के बारे में सोचते हैं तो विचारों में सबसे पहले उसकी आकृति उभरती है। ऐसे ही ओशो के बारे में सोचते ही एक चित्र उभरता है, ओशो की घनी दाढ़ी, उन्नत भाल, समुद्र सी गहराई और बाज-सी तीक्ष्ण दृष्टि वाला उनका व्यक्तित्व एक ऐसा आभा मंडल रचता है, कि हम जैसे लोग जिन्होंने उन्हें सिर्फ फोटो में देखा है, उन्हें पढ़ने या सुनने के लिए विवश हो जाते हैं। ओशो की आवाज, वाणी, उनके शब्द, भाषा शैली, अभिव्यक्ति एवं वक्तव्य की बात करूं तो वह अद्वितीय है।

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December 2025

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वास्तु उपायों से बनाएं नववर्ष को मंगलमय

नया साल अपने साथ खुशियां और सौहार्द लेकर आता है। ऐसे में पूरे वर्ष को और भी ज्यादा खास बनाने के लिए वास्तु संबंधित कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं। इससे घर की परेशानियां दूर होने के साथ आर्थिक तंगी से भी छुटकारा मिलेगा।

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December 2025

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बुद्ध के गुणों का पावन संदेश

जोव्यक्ति बुद्ध होता है, वह सम्यक संबोधि हासिल कर लेता है, वह अनन्त गुणों से भर जाता है। उसके गुणों का ध्यान करते-करते धर्म उजागर होने लगता है। ऐसे में बुद्ध के गुणों का वर्णन करने वाले एक-एक शब्द को समझना आवश्यक है। जो इस प्रकार है-

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December 2025

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इस सदी का चमत्कार हैं ओशो

ओशो से मेरा परिचय धर्मयुग के कारण हुआ उसमें उनके लेख, साक्षात्कार छपते थे। और मेरे कॉर्टून जिसमें मेरा डब्बू जी के नाम से एक कॉलम आता था, जिसे ओशो बहुत पसंद करते थे, यहां तक कि वह अपने प्रवचनों के बीच संन्यासियों को हंसाने के लिए उस पत्रिका को हाथ में लेते और कहते 'देखते हैं इस हफ्ते डब्बू जी क्या कहते हैं' और सबको उसमें से कोई लतीफा सुनाते थे। मैंने ओशो को खूब पढ़ा है। मैं उनके प्रवचनों से बहुत प्रभावित रहा हूं।

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December 2025

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सर्दियों में बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने के अचूक उपाय

सर्दियों के दस्तक देते ही सर्द हवाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो आगे चलकर बच्चों में सर्दी और खांसी की वजह साबित होता है। ऐसे में अगर बात बच्चों की सेहत की करें तो उनका ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है।

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December 2025

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सर्दी-खांसी से बचे रहना चाहते हैं तो जरूर खाएं ये सुपरफूड्स

बदलते मौसम में अक्सर इम्युनिटी कमजोर हो जाती है इसलिए इस दौरान ऐसा आहार लेना चाहिए जो आपको भीतर से मजबूत बनाए। चलिए जानते हैं कि सर्दियों में क्या खाएं कि शरीर को शक्ति और ऊर्जा दोनों मिले।

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December 2025

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बात जो जरूरी है वो जरा अधूरी है

दूसरे ही पृष्ठ पर सर्वप्रथम मेरा चेहरा देखकर आपका हैरान होना लाजमी है क्योंकि मेरा चेहरा इस विशेषांक के साथ न तो निर्णय करता है, न ही कोई तालमेल बिठाता है। क्योंकि न तो मैं कोई प्रसिद्ध हस्ती हूं न ही बुद्धिजीवियों की श्रेणी में मेरा कहीं कोई स्थान है। तो क्या मैं पत्रिका का संपादक होने के नाते पद और पन्नों का फायदा उठा रहा हूं? नहीं। न तो ऐसी मेरी कोई मंशा है, न ही कोई चाल। सच कहूं तो यह मेरी मजबूरी है। पर मेरी इस मजबूरी का संबंध किसी लाचारी या असहाय जैसी नकारात्मक अवस्था से नहीं है। मेरे लिए मजबूरी का मतलब उस विवशता से है जिसके लिए मेरा लिखना ही एक मात्र विकल्प है और यही विकल्प इस अंक का कई हद तक आधार भी है।

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December 2025

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ओशो अस्तित्व की एक अभिव्यक्ति हैं

ओशो से मिलना एक ही शर्त पर होगा- आईना हो जाओ।

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December 2025

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