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कैंसर एक जानलेवा बीमारी
Sadhana Path
|February 2025
कैंसर एक जानलेवा बीमारी मानी जाती है, जिसका खतरा महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही होता है, लेकिन एक स्टडी के मुताबिक 75 की उम्र से पहले पुरुषों में कैंसर का जोखिम 9.81 फ़ीसदी बढ़ जाता है।
इस वर्ष विश्व कैंसर दिवस के मौके पर वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए यह साफ़ कहा जा सकता है कि हम कैंसर से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध ही नहीं हैं। बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बचाने के लिए भी दृढ़ निश्चयी हैं। ऐसे ही तमाम आयामों पर विचार करके इस बार कैंसर दिवस की थीम 'आई एम एंड आई विल' रखी गई है, जोकि 2016 से 2018 तक 'वी कैन, आई कैन' थी। इस बारे में पी अस्पताल नोएडा के डॉक्टर एसोसिएट डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ़ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी नितिन लीखा कहते हैं कि कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज के साथ-साथ सामाजिक विश्लेषण भी करते रहना ज़रूरी है, क्योंकि भारतीय परिवेश में समाज के एक बहुत बड़े तबके में महिलाओं के लिए जिस तरह के शर्मिंदगी भरे नियम गढ़े गए हैं वे महिला केन्द्रित कैंसरों के देर से या डायग्नोज़ ना होने के कारण बनते हैं, जिनसे इन कैंसरों के आंकड़ों में इजाफा होता है, एक आंकड़े के अनुसार देश में हर आठ मिनट में सर्वाइकल कैंसर से एक महिला की मौत होती है। यह केवल खतरनाक ही नहीं है बल्कि चिंताजनक सामाजिक दृष्टिकोण की ओर भी इशारा करता है, जो इस बीमारी के आंकड़ों में इजाफा करता है।
इसी कड़ी में समाज के एक बहुत बड़े तब में पुरुषों की भी ऐसी मज़बूत छवि बनाई गई है, जिसके तहत उनकी तकलीफों के प्रति समाज सहज नहीं रहता बल्कि उनको अपना दर्द बयान करने पर कमज़ोर समझता है, जिसके चलते पुरुष केन्द्रित कैंसर उस तरह से विशेष चर्चा का विषय नहीं बन पाते। एक स्टडी के अनुसार 75 वर्ष की उम्र से पहले कैंसर से होने वाली मौत का जोखिम पुरुषों में 7.34 फ़ीसदी है जबकि यही दर स्त्रियों में 6.28 फ़ीसदी है, साथ ही साल 2018 के आंकड़ों के अनुसार कैंसर से होने वाली मौतों की कुल संख्या 7,84,821 थी, जिसमें पुरुषों की संख्या 4, 13,519 थी। इसलिए इस समय ज़रूरत है कि ऐसे सभी पुरुष केन्द्रित कैंसरों पर भी चर्चा हो और उनका उपाय निकाला जाए।
पुरुषों को प्रभावित करने वाले कैंसर डॉक्टर नितिन कहते हैं कि पुरुषों को खासतौर पर प्रभावित करने वाले कैंसर हैं-
Dit verhaal komt uit de February 2025-editie van Sadhana Path.
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