रत्न दिलाते हैं प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता!
Jyotish Sagar
|January 2022
सौंदर्य हो या भविष्य, रत्नों का प्रभाव अज्ञात नहीं है। ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के प्रथम सूक्त के प्रथम मंत्र में अग्नि को 'रत्नधातमम्' अर्थात् रत्नों को धारण करने वाला सम्बोधित किया गया है।
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प्रतियोगिता के इस युग में सफलता-प्राप्ति के लिए व्यक्ति को हर कदम पर परीक्षा देनी होती है। यहीं व्यक्ति के कर्म के साथ-साथ उसके भाग्य की भी परीक्षा होती है। यदि पूर्ण परिश्रम के बावजूद सफलता नहीं मिल रही हो, तो अवश्य ही जन्मकुण्डली में कोई न कोई दोष है, जिससे ग्रह लाभकारी होकर भी अपना पूर्ण प्रभाव नहीं दे रहा है तथा व्यक्ति को परिश्रम का यथोचित
Dit verhaal komt uit de January 2022-editie van Jyotish Sagar.
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