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Modern Kheti - Hindi
जैविक खेती से गुणवत्तायुक्त उत्पादन लें
जैविक खेती मुख्यतः फसल चक्र, फसल अवशेष, पशु खाद, हरी खाद, प्रक्षेत्र खाद, कम्पोस्ट, जैव उर्वरक, केंचुए की खाद, मृदा आरक्षक फसलें, खलियां तथा कार्बनिक पदार्थों के प्रयोग पर स्थिर है तथा भूमि की उर्वरता को स्थिर रखने, वृद्धि पोषक तत्वों की पूर्ति करने तथा कीट व्याधियों एवं खरपतवारों के नियंत्रण के लिए जैव पीडक प्रणाली पर विश्वास रखती है।
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1st August 2023
Modern Kheti - Hindi
बीज से फसल तक कृषि में खोज ढंगों का योगदान
टिकाऊ कृषि की ओर जाने के अलावा, अच्छी क्वालिटी के बीजों की खोज करना भी आवश्यक है। बीज चयन खोज विधियों में शुद्धता फसल की संपूर्ण गुणवत्ता में सुधार करने में सहायता करेगी। इन खोज विधियों में विशेष गुणों वाले बीजों का ध्यान पूर्वक चयन एवं प्रजनन शामिल होता है जो फसलों की कार्यकारी, उत्पादन एवं स्थिरता को बढ़ाने में सहायता करते हैं।
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1st August 2023
Modern Kheti - Hindi
सब्जी उत्पादन हेतु आवश्यक सुझाव
जब सब्जियों की पैदावार ज्यादा हो और बाजार भाव गिर गया हो तो उनको संरक्षित करके अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। हरी सब्जियों की डिब्बाबंदी, कैनिंग आदि करके इन्हें दूर के बाजारों में भेजा जा सकता है एवं बाजार भाव अच्छा होने पर उन्हें बेचा जा सकता है।
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15th July 2023
Modern Kheti - Hindi
जलवायु परिवर्तन: हमारी पृथ्वी को संरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता
जलवायु परिवर्तन, एक चुनौतीपूर्ण वैश्विक मुद्दा, हमारे समय की परिभाषात्मक चुनौतियों में से एक के रूप में सामने आया है। पिछले कुछ दशकों में, हमारी पृथ्वी को तापमान में महत्वपूर्ण परिवर्तन, बढ़ते तापमान, अत्याधिक मौसमी घटनाएं और अन्य पर्यावरणिक विघटनाओं का सामना करना पड़ा है। यह लेख जलवायु परिवर्तन के कारण और परिणामों पर विचार करता है और इसके प्रभावों को कम करने और हमारे भविष्य की देखभाल करने के लिए तत्काल कार्रवाई की महत्वपूर्णता को उजागर करता है।
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15th July 2023
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खाद्य क्षेत्र से बढ़ते उत्सर्जन से निपटने के लिए भोजन में बदलाव जरूरी
अंतराष्ट्रीय शोधकर्ताओं द्वारा किए एक नए अध्ययन से पता चला है कि पिछले 20 वर्षों में खाद्य आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 14 फीसदी की वृद्धि हुई है, जोकि 200 करोड़ मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर है। रिसर्च के मुताबिक उत्सर्जन में होती इस वृद्धि के लिए मुख्य तौर पर पशु आधारित उत्पादों की बढ़ती खपत जिम्मेवार है।
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15th July 2023
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सिंचाई का जलवायु परिवर्तन पर असर
शोधकर्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम द्वारा किए गए एक नए अध्ययन से पता चलता है कि सिंचाई कैसे दुनिया भर में क्षेत्रीय जलवायु और पर्यावरण पर असर डालती है। अध्ययन यह भी बताता है कि सिंचाई कैसे और कहां नुकसानदायक और फायदेमंद दोनों है। अध्ययन भविष्य में पानी का स्थायी उपयोग और फसलों की उपज हासिल करने के लिए आकलन में सुधार के तरीकों की ओर भी इशारा करता है।
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15th July 2023
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आहारीय तत्वों की कमी को पूरा करने वाले डॉ. नेविन एस. सक्रिमशा
डॉ. नेविन के आहार संबंधी प्रोग्रामों के कारण स्थानीय तौर पर कम मूल्य वाले भोजन पदार्थों का विकास होना शुरु हो गया। डॉ. नेविन द्वारा विकसित किये गये भोजन पदार्थों ने कई विकसित देशों की पौष्टिक आहार की कमी को पूरा किया।
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15th July 2023
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अपना खुद का ईंधन बनाने वाला सफल किसान देवेंद्र परमार
श्री परमार का मानना है कि किसानों को अपने वित्त का प्रबंधन करने के लिए खुद का कौशल बढ़ाते रहना चाहिए। किसानों को हमेशा खेती के पुराने तरीकों को छोड़ कर कमाई के नए अवसरों और तरीकों की तलाश करनी चाहिए।
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15th July 2023
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पानी की बचत के लिए बसंत मक्का की बिजाई पर पाबंदी की आवश्यकता
यह तीसरी फसल फरवरी में बोई जाती है और जून में काटी जाती है, और यह पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की अत्याधिक अनुशंसित सूची में है क्योंकि राज्य पहले से ही खतरनाक स्तर पर भूजल स्तर की कमी से जूझ रहा है।
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15th July 2023
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मक्की की अधिक पैदावार लेने हेतु सस्य क्रियाएं
मक्की हरियाणा राज्य के मुख्यतः अम्बाला, पंचकुला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर व करनाल जिलों की खरीफ की फसल है। किसान भाईयों को मक्की की अधिक पैदावार लेने हेतु निम्नलिखित सस्य क्रियाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए :-
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15th July 2023
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बाजरे की खेती - जलवायु, किस्में, देखभाल और पैदावार
बाजरा की फसल मुख्यतः बारानी क्षेत्रों में ली जाती है, परन्तु फूल आते समय व दाना बनते समय नमी की कमी होना अधिक हानिप्रद है। अतः यदि सिंचाई का स्त्रोत उपलब्ध हो तो इन क्रांतिक अवस्थाओं पर सिंचाई करना लाभप्रद होता है। बाजरा जल भराव से भी प्रभावित होता है इसलिए जल निकास का समुचित प्रबंध करें।
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15th July 2023
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प्राकृतिक कृषि का आधार: नीम
नीम प्राचीनकाल से ही हमारी औषधीय एवं भैषज्य परम्परा का अभिन्न अंग रहा है। वैदिक रचनाओं में निम्बः, निम्बा, निम्बपत्राम् जैसे शब्दों का वर्णन आया है। अग्नि पुराण में कुष्ठ रोग के निदान हेतु नीम के प्रयोग का परामर्श दिया गया है। नीम को स्वास्थवर्द्धक बताया गया है। इसी कारण नीम वृक्ष को धरती का कल्प वृक्ष या देव वृक्ष भी कहा जाता है।
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15th July 2023
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कीटनाशक अवशेषों से बचाव के लिए एक वैकल्पिक दृष्टिकोण
भारत में हरित क्रांति की सफलता का एक मुख्य कारण फसल सुरक्षा के उपायों के रूप में सिंथेटिक कीटनाशकों का उपयोग था
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15th July 2023
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किसानों को उद्यमी बनने की आवश्यकता
मनुष्य की सभी समस्याओं का समाधान मनुष्य के अपने उद्यम में है। उसके दर्द में है। उसकी सोच में है। उसके अपने विश्वास में है। मनुष्य स्वार्थी भी है, परन्तु मनुष्य समूह के लिए चिंता एवं चिंतन भी करता आया है। भारत की गरीबी की समस्या का समाधान भी मनुष्य जाति ने करना है।
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15th July 2023
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खादों के अधिक प्रयोग के कारण मिट्टी के स्वास्थ्य में बिगाड़
पंजाब के किसानों के लिए एक बड़ी चिंता की बात यह है कि रासायनिक उर्वरकों के अत्याधिक उपयोग के कारण राज्य में मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है
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15th July 2023
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टमाटर की वैज्ञानिक खेती
सब्जियों में टमाटर एक अत्यंत लोकप्रिय सब्जी है।
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1st July 2023
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धान की फसल के लिये पूसा शैवाल
डॉ० राघवेंद्र सिंह, सहायक प्राध्यापक, शारदा कृषि महाविद्यालय शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश
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1st July 2023
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एक वैकल्पिक संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकी : धान की सीधी बिजाई
पवन कुमार, सुरेंद्र मित्तल और राजेश कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र, जींद
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1st July 2023
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मक्की के प्रमुख कीट प्रबंधन
बीज के लिए केवल स्वस्थ भुट्टे ही रखें, जो बोरर के हमले से मुक्त हों। ढूंठों, डंठलों, भुट्टों और कोर जैसे पौधों के अवशेषों में शीतनिद्रा में रहने वाले बोरर लार्वा को मार दें।
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1st July 2023
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वर्ल्ड फूड प्राईज़ विजेता डॉ. मार्क वैन मोनटैगू
मोनटैगू कई अकादमी जैसे कि नेशनल अकादमी ऑफ साइंसिज ऑफ द यूनाईटिड स्टेटस, इटली एंड थर्ड वर्ल्ड अकादमी ऑफ साईंसिज, द अकादमी ऑफ एग्रीकल्चर ऑफ फ्रांस एंड रशिया एवं अकादमी ऑफ इंजीनियरिंग के सदस्य भी हैं।
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1st July 2023
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जलवायु परिवर्तन के कारण लीची एवं आम उत्पादन प्रभावित
गर्मी की लहर ने न सिर्फ गर्मी के फलों जैसे- लीची और आम की आमद पर असर डाला है, बल्कि उनके स्वाद को भी प्रभावित कर दिया है। लीची और आम उगाने वाले किसानों ने कहा कि कटाई के मौसम में बढ़ते तापमान के कारण फलों की गुणवत्ता और उपज प्रभावित हो रही है।
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1st July 2023
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कैसे घटे खेती में ग्रीन गैसों की निकासी
खेती जो दुनिया भर में करोड़ों लोगों का पेट भरती है वो साथ ही जलवायु में आते बदलावों के लिए भी जिम्मेवार है।
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1st July 2023
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बंजर हो रही भूमि एक चुनौती
मरुस्थलीकरण यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शुष्क भूमि अपनी उत्पादकता खो देती है। इसमें पौधों को सहारा देने, अन्न उत्पादन करने, आजीविका उपलब्ध कराने की जमीन की क्षमता खत्म होने लगती है।
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1st July 2023
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सफेद मक्खी एवं गुलाबी सुंडी ने खा लिया नरमे का क्षेत्रफल
पंजाब में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान नरमे की बिजाई अधीन क्षेत्रफल बड़े स्तर पर कम हो गया है।
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1st July 2023
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पीएयू की ओर से विकसित बाजरे की दो एवं मक्का की एक किस्म को राष्ट्रीय स्तर पर काश्त के लिए मिली स्वीकृति
बीते दिनों पालमपुर में आयोजित नेशनल ग्रुप मीट में पीएयू की ओर से विकसित चारे वाली मक्का की एक किस्म के साथ दो चारे वाली बाजरे की किस्मों को काश्त के लिए स्वीकृति मिली। यह पहली बार है कि पीएयू की चारे की फसलों की तीन किस्में एक ही समय राष्ट्रीय स्तर पर जारी हो रही हैं।
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1st July 2023
Modern Kheti - Hindi
पोस्ट हार्वेस्टिंग के उपरांत बागवानी फसलों का रखरखाव
कृषि विशेषज्ञों की सिफारिशों को मानते हुए किसान भाई कठिन परिश्रम, पैसा एवं ऊर्जा व्यय करके फल एवं सब्जियों की अधिक पैदावार करते हैं।
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1st July 2023
Modern Kheti - Hindi
पोस्ट हार्वेस्टिंग नुक्सान को समझने की आवश्यकता
विकासशील देशों में खाद्य पदार्थ की बर्बादी अधिकतर कृषि उत्पादन के समय होती है। जबकि दर्मियाने एवं अधिक आमदनी वाले देशों में यह नुकसान मंडीकरण के समय अधिक होता है। एक अनुमान के अनुसार हमारे देश में प्रत्येक वर्ष जितना खाद्य पदार्थ व्यर्थ हो जाता है, यदि उस पर नियंत्रण कर लिया जाये तो इससे देश की कुल आबादी को वर्ष में 365 दिनों तक भोजन उपलब्ध करवाया जा सकता है।
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1st July 2023
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राजनीति का तमाशा ईमानदारी पर तमाचा है ब्याज माफी
विधानसभा चुनाव से पूर्व मप्र सरकार ने डिफाल्टर किसानों के लिये ब्याज माफी की घोषणा कर स्वयं की पीठ जरुर थपथपाई है।
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15th June 2023
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मधुमेह रोगियों के लिये मिलेट आहार एक वरदान
मिलेट में दो तरह के अनाज होते हैं- एक मोटा अनाज और दूसरा छोटे दाने का अनाज।
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15th June 2023
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गोबर... काला सोना इसे न जलायें
हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है। यहां के किसान प्राचीन काल से ही अपनी खेती में पशुओं का गोबर एवं मलमूत्र का उपयोग करते हैं। लेकिन वास्तविकता में लोग इन्हें ना तो उचित रूप में जमा करते हैं और ना ही उचित ढंग से इस्तेमाल। इससे हमारे देश में गोबर की खाद की गुणवत्ता इतनी अच्छी नहीं होती है, जितनी होनी चाहिए।
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