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Dainik Bhaskar Shahdol - July 03, 2025

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Dainik Bhaskar Shahdol
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Dainik Bhaskar Shahdol Description:

Dainik Bhaskar is present in 2 states in Hindi language in Madhya Pradesh and in Maharashtra. More than 25 year old flagship Hindi newspaper of Bhaskar Prakashan Group Only Hindi newspaper to have clear leadership in all its major markets with well diversified readership across various states Spread in 2 states with 7 editions and 43 district sub- editions Bhaskar Prakashan Pvt Ltd newspapers has an average daily readership of 1.85 million readers.

In dit nummer

July 03, 2025

साइबर ठगी के पीड़ितों का दर्द... अपने ही ताने मारते हैं और हंसते हैं

ऑनलाइन ठगी का दर्द अब सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं रहा है। असली चोट तब लगती है, जब अपनों से ताने मिलते हैं। कोई कहता है- 'इतना भी नहीं समझ पाए?' कोई मुस्कुराकर कहता है- 'इतने पढ़े-लिखे होकर भी फंस गए?' शर्म, गुस्सा, डर और आत्मग्लानि ...। पीड़ित खुद से भी नजरें चुराने लगते हैं। फोन उठाना बंद कर देते हैं। रिश्तेदारों से दूरी बना लेते हैं। कुछ के लिए तो अपना ही घर अब जेल बन चुका है। भास्कर ने लुधियाना में ऐसे 5 लोगों को तलाशा, जो साइबर ठगी के शिकार हुए थे। उनकी जिंदगी पूरी तरह बदली हुई है। हर मामले में सिर्फ रकम नहीं गई, बल्कि रिश्तों में दरार, समाज से अलगाव और मानसिक तनाव सामने आया है। इस रिपोर्ट में सभी पीड़ितों की पहचान गुप्त रखी गई है। बहुत से ऐसे पीड़ित हैं, जो बात भी नहीं करना चाहते।

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पर्यावरण संरक्षण के लिए कपड़े व जूट से बने थैलों का करें उपयोग, लोगों को जागरूक कर कहलाएं पर्यावरण मित्र

मानव और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा संबंध है। जिसके बिना हमारा जीवन संभव नहीं है। इसके लिए हमारा पर्यावरण के प्रति सचेत रहना जरूरी है। अधिक से अधिक पौधरोपण के साथ सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार हमारे पर्यावरण के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। जिसमें प्लास्टिक थैलियों, डिस्पोजेबल गिलास, कटोरी, दोने आदि शामिल हैं। आज 3 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस है। यह दिवस हमें प्लास्टिक के दुष्परिणामों के संबंध में सचेत करते हुए बताता है कि प्लास्टिक की थैलियां पर्यावरण को किस कदर नुकसान पहुंचा रही हैं। इस संबंध में हमने शहर के युवाओं से चर्चा कर जाना कि प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग को कम करने के लिए किस तरह के प्रयास किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए जागरूकता जरूरी है। लोगों को यह समझना चाहिए कि हम इन थैलियों का उपयोग करके पर्यावरण के साथ खुद को बहुत बड़ी क्षति पहुंचा रहे हैं। यदि नागरिक कपड़े अथवा जूट के थैले लेकर निकलेंगे तो वे पर्यावरण मित्र कहलाएंगे।

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