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कौन हैं देव, कितने हैं देव और कितनी हैं उनकी पूजा पद्धतियाँ?
Jyotish Sagar
|March 2026
ऋग्वेद में एक स्थान पर 11 स्वर्ग के, 11 पृथ्वी के और 11 अन्तरिक्ष के इस तरह 33 देवता बताएँ हैं। दूसरी जगह अग्नि, वायु, इन्द्र और मित्र आदि 33 देवता तथा सरस्वती, सूनृता, इला, इन्द्राणि आदि 12 देवियों के नाम मिलते हैं।
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नित्य एवं नवरात्र आदि विशेष अवसरों पर विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा-उपासना की जाती है। अलग-अलग देवों की उपासना से परब्रह्म की ही उपासना होती है। यद्यपि देवता कौन हैं और कितने हैं? इसके अलग-अलग उत्तर मिलते हैं। वेदान्ती केवल ब्रह्म को ही देवता मानते हैं। यास्क ने दान और दीपन करने वाले जो 'द्यौः' नामक स्थान में रहते हैं, उनको देवता कहा है। इसके अतिरिक्त सृष्टि में जो भी प्रकाशमान हैं, वे सब देवता माने गए हैं। सूर्य, चन्द्र, इन्द्र, अग्नि, वायु, उषा आदि वैदिक देवता हैं।
पौराणिक मतानुसार अदिति के पुत्र आदित्य या देवता हैं। देवताओं की संख्या भी अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग मिलती है। वेदान्त के अनुसार केवल एक ब्रह्म है। जनता प्रकृति और पुरुष दो जानते हैं। पुराणों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीन देवता हैं। ऋग्वेद में इन्द्र, मित्र, वरुण और अग्नि चार प्रमुख देवता हैं। आह्निकतत्त्व में विष्णु, रुद्र, गणेश, सूर्य और शक्ति ये पाँच देवता बताए गए हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार गणेश, महेश, दिनेश, वह्नि, विष्णु और उमा-ये छह देवता हैं। शतपथ में 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, 1 इन्द्र और 1 प्रजापति इस तरह 33 देवता बताए गए हैं। ऋग्वेद में एक स्थान पर 11 स्वर्ग के, 11 पृथ्वी के और 11 अन्तरिक्ष के इस तरह 33 देवता बताएँ हैं। दूसरी जगह अग्नि, वायु, इन्द्र और मित्र आदि 33 देवता तथा सरस्वती, सूनृता, इला, इन्द्राणि आदि 12 देवियों के नाम मिलते हैं। एक अन्य स्थान पर 3339 देवता बताए गए हैं। ऐतरेय ब्राह्मण में 33 'सोमप' और 33 'असोमप' कुल 66 संख्या मिलती है। इनमें 1 इन्द्र, 1 प्रजापति, 8 वसु, 11 रुद्र और 12 आदित्य 'सोमप' अर्थात् सोम पीने वाले हैं, वहीं 11 प्रयाज, 11 अनुयाज और 11 उपयाज 'असोमप' अर्थात् सोम से भिन्न पेय पीने वाले हैं। अग्निपुराण के अनुसार 149 देवी और सूर्य पुराण के अनुसार 200 देवता हैं। पद्मपुराण में 33 करोड़ देवी-देवता का उल्लेख मिलता है।
शास्त्रों में पंचदेव की पूजा-उपासना की प्रधानता मिलती है। पंचदेव में हैं-विष्णु, शिव, गणेश, सूर्य और शक्ति।
Denne historien er fra March 2026-utgaven av Jyotish Sagar.
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