Facebook Pixel कौन हैं देव, कितने हैं देव और कितनी हैं उनकी पूजा पद्धतियाँ? | Jyotish Sagar - religious-spiritual - Les denne historien på Magzter.com
Gå ubegrenset med Magzter GOLD

Gå ubegrenset med Magzter GOLD

Få ubegrenset tilgang til over 9000 magasiner, aviser og premiumhistorier for bare

$149.99
 
$74.99/År

Prøve GULL - Gratis

कौन हैं देव, कितने हैं देव और कितनी हैं उनकी पूजा पद्धतियाँ?

Jyotish Sagar

|

March 2026

ऋग्वेद में एक स्थान पर 11 स्वर्ग के, 11 पृथ्वी के और 11 अन्तरिक्ष के इस तरह 33 देवता बताएँ हैं। दूसरी जगह अग्नि, वायु, इन्द्र और मित्र आदि 33 देवता तथा सरस्वती, सूनृता, इला, इन्द्राणि आदि 12 देवियों के नाम मिलते हैं।

कौन हैं देव, कितने हैं देव और कितनी हैं उनकी पूजा पद्धतियाँ?

नित्य एवं नवरात्र आदि विशेष अवसरों पर विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा-उपासना की जाती है। अलग-अलग देवों की उपासना से परब्रह्म की ही उपासना होती है। यद्यपि देवता कौन हैं और कितने हैं? इसके अलग-अलग उत्तर मिलते हैं। वेदान्ती केवल ब्रह्म को ही देवता मानते हैं। यास्क ने दान और दीपन करने वाले जो 'द्यौः' नामक स्थान में रहते हैं, उनको देवता कहा है। इसके अतिरिक्त सृष्टि में जो भी प्रकाशमान हैं, वे सब देवता माने गए हैं। सूर्य, चन्द्र, इन्द्र, अग्नि, वायु, उषा आदि वैदिक देवता हैं।

पौराणिक मतानुसार अदिति के पुत्र आदित्य या देवता हैं। देवताओं की संख्या भी अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग मिलती है। वेदान्त के अनुसार केवल एक ब्रह्म है। जनता प्रकृति और पुरुष दो जानते हैं। पुराणों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीन देवता हैं। ऋग्वेद में इन्द्र, मित्र, वरुण और अग्नि चार प्रमुख देवता हैं। आह्निकतत्त्व में विष्णु, रुद्र, गणेश, सूर्य और शक्ति ये पाँच देवता बताए गए हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार गणेश, महेश, दिनेश, वह्नि, विष्णु और उमा-ये छह देवता हैं। शतपथ में 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, 1 इन्द्र और 1 प्रजापति इस तरह 33 देवता बताए गए हैं। ऋग्वेद में एक स्थान पर 11 स्वर्ग के, 11 पृथ्वी के और 11 अन्तरिक्ष के इस तरह 33 देवता बताएँ हैं। दूसरी जगह अग्नि, वायु, इन्द्र और मित्र आदि 33 देवता तथा सरस्वती, सूनृता, इला, इन्द्राणि आदि 12 देवियों के नाम मिलते हैं। एक अन्य स्थान पर 3339 देवता बताए गए हैं। ऐतरेय ब्राह्मण में 33 'सोमप' और 33 'असोमप' कुल 66 संख्या मिलती है। इनमें 1 इन्द्र, 1 प्रजापति, 8 वसु, 11 रुद्र और 12 आदित्य 'सोमप' अर्थात् सोम पीने वाले हैं, वहीं 11 प्रयाज, 11 अनुयाज और 11 उपयाज 'असोमप' अर्थात् सोम से भिन्न पेय पीने वाले हैं। अग्निपुराण के अनुसार 149 देवी और सूर्य पुराण के अनुसार 200 देवता हैं। पद्मपुराण में 33 करोड़ देवी-देवता का उल्लेख मिलता है।

शास्त्रों में पंचदेव की पूजा-उपासना की प्रधानता मिलती है। पंचदेव में हैं-विष्णु, शिव, गणेश, सूर्य और शक्ति।

FLERE HISTORIER FRA Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

क्या लिखा है हमारे भाग्य में...?

ज्योतिष और प्रारब्ध

time to read

13 mins

May 2026

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

ग्रहों के अंशों का महत्त्व

लग्न की डिग्री बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। कुण्डली में जितने भी ग्रहों की डिग्री लग्न की डिग्री के आस-पास होते हैं, वे सभी अपना पूर्ण फल देने में समर्थ होते हैं।

time to read

8 mins

May 2026

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें मनाएँ कैसे?

मनुष्य का पूरा जीवन 9 ग्रहों की 27 नक्षत्रों में चाल और दृष्टि पर टिका हुआ है। सामान्य भाषा में कहें, तो जब ग्रहों की कृपा होती है, तो मनुष्य बलवान् हो जाता है और जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो वह भिखारी भी बन जाता है। इस आलेख में हम बता रहे हैं कि जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें कैसे मनाएँ?

time to read

2 mins

May 2026

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

कन्या लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र एवं शनि के फल

कैसे करें सटीक फलादेश (भाग-227)

time to read

7 mins

May 2026

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

श्रीशंकराचार्यकृत श्रीनृसिंहभुजङ्गस्तोत्रम्

(मूल मातृका/पाण्डुलिपि से प्रथम बार प्रकाशित एवं अनूदित)

time to read

6 mins

May 2026

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

कोकिलावन जहाँ शनिदेव रो पड़े श्रीकृष्ण के दर्शन को!

मथुरा जनपद की पावन भूमि, जहाँ प्रत्येक कण में श्रीकृष्ण की लीलाओं की सुगन्ध व्याप्त है, वहीं कोसी और नन्दगाँव के मध्य स्थित कोकिलावन दिव्य और रहस्यमयी तीर्थस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।

time to read

3 mins

May 2026

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

कैसी रहेगी सम्राट चौधरी की सरकार?

शपथ ग्रहण कुण्डली विश्लेषण

time to read

2 mins

May 2026

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

कुण्डली में विवाह, सन्तान एवं दाम्पत्य सुख : एक पर्यवेक्षण

मनुष्य जीवन का सबसे कोमल, जटिल और जरूरी पक्ष होता है- विवाह, सन्तान और दाम्पत्य जीवन। यह वह पक्ष है जहाँ प्रेम, आत्मीयता, त्याग और संघर्ष की असली परीक्षा होती है।

time to read

5 mins

May 2026

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

नीचराशिस्थ बुध के फल

जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन (भाग-21)

time to read

13 mins

May 2026

Jyotish Sagar

Jyotish Sagar

वोट से क्रान्ति के नायक पीटर माग्यार

जन्मपत्रिका विश्लेषण

time to read

9 mins

May 2026

Listen

Translate

Share

-
+

Change font size