Prøve GULL - Gratis
'कश्मीर' पूर्व में था 'कश्यपमीर'!
Jyotish Sagar
|February 2025
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में दिल्ली में एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में कहा था कि 'कश्मीर' को 'कश्यप की भूमि' के नाम से जाना जाता है।
-
हो सकता है कि उनके नाम से कश्मीर का नाम पड़ा हो। उसके बाद से कश्मीर के नामकरण के सम्बन्ध में मीडिया में चर्चाएँ तेज हो गयीं और इस सम्बन्ध में लोगों की जिज्ञासा बढ़ी कि कश्मीर का नामकरण कैसे हुआ? कश्मीर से कश्यप ऋषिका नाम क्यों और कैसे जुड़ा है?
वस्तुत: कश्मीर नामकरण के सम्बन्ध में अनेक मत प्रचलित हैं। कुछ 'कश्मीर' शब्द में इसका मूल खोज हैं। उनमें से एक मत के अनुसार कश्मीर शब्द 'क' और 'शिमीरा' से मिलकर बना है। 'क' का अर्थ है 'जल' और 'शिमीरा' का अर्थ है 'सूखना'। यानी पानी से सूखी जमीन कश्मीर है। भूगर्भविदों के अनुसार कश्मीर की भूमि पर पहले समुद्र था। इसी मत के आधार पर इस प्रकार की किंवदंतियाँ प्रचलित हुई हैं। किताब 'कश्मीर थ्रू द एजेज' के अनुसार कश्मीर शब्द 'क' और 'समीर' से मिलकर बना है। 'क' का अर्थ है 'जल' और 'समीर' का अर्थ 'हवा'। सूफी मतानुसार कश्मीर शब्द की उत्पत्ति 'कस' और 'मीर' शब्द से हुई है। 'कस' का अर्थ है 'दरार' और 'मीर' का अर्थ है 'पहाड़' यानी पहाड़ों की भूमि कश्मीर है।
इस सम्बन्ध में एक कथा 'नीलमत पुराण' में मिलती है, जिसमें कहा गया है कि कश्मीर घाटी पहले सतीसर नामक एक झील थी, जिसमें जलोद्भव नामक राक्षस रहता था, जिसे ब्रह्मा से वर प्राप्त था कि उसकी मृत्यु जल में नहीं होगी। इस वर को प्राप्त कर वह घाटी में रहने वाले नागों को प्रताड़ित करने लगा, तब महर्षि कश्यप ने उस झील को सुखा दिया और जलोद्भव मारा गया। उसके बाद कश्मीर में इंसानी बस्तियाँ बसीं। कश्यप के नाम से ही कश्मीर को प्राचीन काल में 'कश्यपमेरू', 'कश्यपमीर', 'कश्यपपुरा' आदि नामों से जाना गया। कश्पयमेरू का अर्थ है कश्यप का पहाड़, जो कि सम्भवत: हरि पर्वत है। कश्यपमीर अर्थात् कश्यप की झील। कश्यपपुरा कश्मीर में वह पहली बस्ती थी, जहाँ इंसानों ने रहना प्रारम्भ किया। यह कथा 'वाकयात ए-कश्मीर' में भी मिलती है, जहाँ कश्यप के स्थान पर काशेफ जिन्न और जलोद्भव राक्षस का नाम जलदेव मिलता है। 'वाकयात-ए-कश्मीर' 1747 ई. में ख्वाजा मोहम्मद आजम दीदामरी द्वारा लिखा फारसी ग्रन्थ है।
Denne historien er fra February 2025-utgaven av Jyotish Sagar.
Abonner på Magzter GOLD for å få tilgang til tusenvis av kuraterte premiumhistorier og over 9000 magasiner og aviser.
Allerede abonnent? Logg på
FLERE HISTORIER FRA Jyotish Sagar
Jyotish Sagar
क्या लिखा है हमारे भाग्य में...?
ज्योतिष और प्रारब्ध
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
ग्रहों के अंशों का महत्त्व
लग्न की डिग्री बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। कुण्डली में जितने भी ग्रहों की डिग्री लग्न की डिग्री के आस-पास होते हैं, वे सभी अपना पूर्ण फल देने में समर्थ होते हैं।
8 mins
May 2026
Jyotish Sagar
जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें मनाएँ कैसे?
मनुष्य का पूरा जीवन 9 ग्रहों की 27 नक्षत्रों में चाल और दृष्टि पर टिका हुआ है। सामान्य भाषा में कहें, तो जब ग्रहों की कृपा होती है, तो मनुष्य बलवान् हो जाता है और जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो वह भिखारी भी बन जाता है। इस आलेख में हम बता रहे हैं कि जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें कैसे मनाएँ?
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कन्या लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र एवं शनि के फल
कैसे करें सटीक फलादेश (भाग-227)
7 mins
May 2026
Jyotish Sagar
श्रीशंकराचार्यकृत श्रीनृसिंहभुजङ्गस्तोत्रम्
(मूल मातृका/पाण्डुलिपि से प्रथम बार प्रकाशित एवं अनूदित)
6 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कोकिलावन जहाँ शनिदेव रो पड़े श्रीकृष्ण के दर्शन को!
मथुरा जनपद की पावन भूमि, जहाँ प्रत्येक कण में श्रीकृष्ण की लीलाओं की सुगन्ध व्याप्त है, वहीं कोसी और नन्दगाँव के मध्य स्थित कोकिलावन दिव्य और रहस्यमयी तीर्थस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
3 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कैसी रहेगी सम्राट चौधरी की सरकार?
शपथ ग्रहण कुण्डली विश्लेषण
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कुण्डली में विवाह, सन्तान एवं दाम्पत्य सुख : एक पर्यवेक्षण
मनुष्य जीवन का सबसे कोमल, जटिल और जरूरी पक्ष होता है- विवाह, सन्तान और दाम्पत्य जीवन। यह वह पक्ष है जहाँ प्रेम, आत्मीयता, त्याग और संघर्ष की असली परीक्षा होती है।
5 mins
May 2026
Jyotish Sagar
नीचराशिस्थ बुध के फल
जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन (भाग-21)
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
वोट से क्रान्ति के नायक पीटर माग्यार
जन्मपत्रिका विश्लेषण
9 mins
May 2026
Listen
Translate
Change font size
