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मिथुन लग्न के नवम भाव में स्थित - गुरु एवं शुक्र के फल
Jyotish Sagar
|February 2025
प्रस्तुत लेखमाला "कैसे करें सटीक फलादेश?" के अन्तर्गत मिथुन लग्न के नवम भाव में स्थित सूर्यादि नवग्रहों के फलों का विवेचन किया जा रहा है, जिसमें अभी तक सूर्य से बुध तक के फलों का विवेचन किया जा चुका है। उसी क्रम में प्रस्तुत आलेख में गुरु एवं शुक्र के नवम भाव में राशिगत, भावगत, नक्षत्रगत, युतिजन्य व दृष्टिजन्य फलों का विवेचन कर रहे हैं।
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कैसे करें सटीक फलादेश? (भाग-211)
मिथुन लग्न के नवम भाव में स्थित गुरु के फल
मिथुन में गुरु सप्तमेश एवं कर्मेश होकर नवम भाव में सम राशि कुम्भ में स्थित होता है। केन्द्रेश का त्रिकोण भाव नवम में स्थित होना सामान्यतः शुभ फलप्रद माना जाता है। नैसर्गिक रूप से भी गुरु की नवम भाव में उपस्थिति शुभ ही मानी जाती है। यहाँ स्थित गुरु जातक को धार्मिक, संस्कारवान, अपनी संस्कृति पर गर्व महसूस करने वाला, विनम्र एवं माता-पिता सहित परिजनों की समुचित देखभाल करने वाला होता है। नवम भावस्थ गुरु के चलते जातक वैष्णव धर्मानुयायी होता है तथा आध्यात्मिक गुरु के प्रति आस्था रखने वाला होता है। यदि गुरु का सम्बन्ध बुध, शुक्र अथवा शनि से हो, तो राजयोग का निर्माण होता है और जातक को कॅरिअर में अपेक्षानुरूप सफलता प्राप्त होती है।
Denne historien er fra February 2025-utgaven av Jyotish Sagar.
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