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गजलक्ष्मी रूपी स्त्री प्राप्ति के योग

Jyotish Sagar

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February 2024

यदि चतुर्थ भाव में वृषभ राशि हो और उसमें चन्द्रमा स्थित हो तथा दशम अथवा अष्टम स्थान में गुरु स्थित हो, तो ऐसे योग वाली स्त्री विवाह होकर जिस परिवार में जाती है, उसके अशुभ फलों को नष्ट करके घर को शुभता से भर देती है।

- डॉ. अमित कुमार 'राम'

गजलक्ष्मी रूपी स्त्री प्राप्ति के योग

क स्त्री का प्रभाव उसके पति पर ही नहीं, वरन् पूरे परिवार पर पड़ता है। एक स्त्री घर का आधार होती है। उसी से घर प्रसिद्धि प्राप्त करता है। स्त्री के कर्मों से ही परिवार यश तथा अपयश प्राप्त करता है।

शास्त्र कहता है कि यदि स्त्री दुर्भाग्य तथा अशुभता लेकर घर में आई है, तो पुरुष जातक का जन्म कितने ही राजयोगों के साथ हुआ हो, लेकिन पहले उसे स्त्री के दुर्भाग्य के फलों को भोगना होगा और वहीं यदि स्त्री सौभाग्य तथा राजयोग लेकर घर में आई है, तो फिर र पुरुष के ग्रह चाहे कितने ही विपरीत हों, कुयोग हों, लेकिन स्त्री का सौभाग्य उसे अपना फल देने लगता है और यह केवल स्त्री पर ही लागू नियम है, अत: एक स्त्री का जीवन में बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान होता है और इसी कारण विवाह के समय मनुष्य सौभाग्यवती स्त्री की तलाश ही अधिक करता है। ऐसे कुछ योग जन्मपत्रिका में बन रहे हों, तो वह स्त्री बहुत ही कुलवर्धिनी और सौभाग्यशालिनी होती है। इनके कुछ सूत्र निम्नलिखित हैं:

1. जब स्त्री की जन्मपत्रिका में चन्द्रमा लग्न में हो अथवा लग्न को देखता हो, दशम भाव में बुध स्थित हो और लाभ भाव में सूर्य स्थित हो, तो ऐसी स्त्री घर की बरकत तथा सुख के लिए बहुत ही सौभाग्यशालिनी होती वह रूपवती, गुणवती होती है और सरकारी नौकरी में किसी अच्छे पद पर बैठती है अथवा उसके कर्मों से उसका पति सरकारी अफसर या व्यवसायी होता है।

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