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अमेरिका में भारत को मिले खास दर्जे का बीता दौर

Business Standard - Hindi

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September 23, 2025

वह समय बीत चुका है जिसमें भारत और भारतीय यह मान सकते थे कि अमेरिका उनके साथ विशेष व्यवहार करेगा। भारत अपवाद था मगर यह व्यवस्था खत्म हो गई है। बता रहे हैं मिहिर एस शर्मा

एच-1बी वीजा पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का नया ऐलान क्या भारत को निशाना बनाने के लिए उठाया गया एक और कदम है? आखिरकार, दो-तिहाई से अधिक एच-1 बी वीजा भारतीयों को दिए जाते हैं और भारतीय कंपनियां इस वीजा के सबसे बड़े लाभार्थियों में शुमार हैं।

शायद हां। एक नजरिये से ट्रंप के सभी कदम वास्तव में ऐसे लग रहे हैं कि जैसे वह भारत को जान-बूझकर निशाना बना रहे हैं। वह भारतीय वस्तुओं पर पहले ही 50 फीसदी शुल्क लगा चुके हैं। इस साल की शुरुआत में अमेरिका ने रेमिटेंस टैक्स यानी प्रेषण कर भी लगा दिया था जिसका बोझ वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों पर पड़ सकता है। अमेरिका के पाकिस्तान के साथ संबंध भी बेहतर होते दिख रहे हैं, जबकि इसकी कोई ठोस वजह नहीं नजर आती। ट्रंप मंत्रिमंडल के कई सदस्यों ने भारत पर तल्ख टीका-टिप्पणी करने में कोई कोई कसर नहीं छोड़ी है।

एच-1बी वीजा पर ट्रंप के फैसले ने पिछले कुछ दिनों में सुर्खियां जरूर बटोरी हैं लेकिन इसके साथ ही दो अन्य घटनाक्रम भी हुए हैं। रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट सदस्यों ने विशेष रूप से भारत से झींगा मछली के आयात पर 40 फीसदी शुल्क लादने के लिए एक विधेयक पेश किया। इसके अलावा अमेरिकी प्रशासन ने ईरान स्वतंत्रता और प्रसार-रोधी अधिनियम के तहत भारत को विशिष्ट रियायत देने का प्रावधान निलंबित करने का निर्णय लिया जिसका इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा था कि चाबहार बंदरगाह को प्रतिबंधों की जद से बाहर रख इसका निर्माण किया जा सके। यह रियायत भारत को 2018 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान दी गई थी। मगर अब हुए घटनाक्रम इस बात के संकेत हैं कि अमेरिका खासकर ट्रंप प्रशासन का रवैया भारत के प्रति कितना बदल गया है।

हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका बहुत कुछ कर सकता है। उदाहरण के लिए रूस में बनी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली एस-400 की खरीद के लिए प्रतिबंध अधिनियम के माध्यम से अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला (सीएएटीएसए) के पूर्ण प्रावधान भारत पर लागू किया जा सकते हैं। ऐसा उस स्थिति में हो सकता है जब भारत निकट भविष्य में अमेरिका से हथियार खरीद का कोई बड़ा सौदा नहीं करने का इरादा जताता है।

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